Bihar News: NTPC की 6 यूनिट बंद: बिहार में बिजली की किल्लत, गांवों में 10 घंटे तक नहीं मिल रही बिजली
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Jul 2022 12:29 PM
Bihar News: NTPC की 6 यूनिट बंद होने से बिजली की सप्लाई कम हो गई है. इसके कारण बिहार में बिजली की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है. गांवों में 10-10 घंटे तक बिजली की कटौती करनी पड़ रही है.
बिहार में नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (NTPC) की छह यूनिट, कांटी, नवीनगर और बरौनी के बंद होने से बिहार में बिजली की भारी किल्लत हो गई. बीते दिन राज्य को जरूरत से 1500 मेगावाट तक कम बिजली मिली. शहर से लेकर गांव तक घंटों बिजली गुल रही. शहरों में चार से पांच घंटे तो ग्रामीण इलाकों में आठ से 10 घंटे तक कटौती हो रही है.
बिजली वितरण कंपनी एसबीपीडीसीएल-एनबीपीडीसीएल के अधिकारियों के अनुसार एनटीपीसी कांटी की एक यूनिट बंद होने से 133 मेगावाट,नवीनगर की एक यूनिट बंद होने से 525 मेगावाट और बरौनी की तीन यूनिट,यानी यूनिट संख्या सात बंद होने से 110 मेगावाट, यूनिट संख्या छह बंद होने से 93 मेगावाट और यूनिट संख्या आठ बंद होने से बिहार को 230 मेगावाट कम बिजली मिली.
एनटीपीसी फरक्का की यूनिट संख्या छह बंद होने से बिहार को 101 मेगावाट कम बिजली मिल. इन यूनिटों में अधिकतर के बंद होने का तकनीकी कारण है. किसी का ट्यूब लिकेज हो गई है तो किसी यूनिट में कुछ और तकनीकी खराबी आ गई है. इस कारण बिहार को केंद्रीय कोटा से 1196 मेगावाट कम बिजली मिली. निजी कंपनियों के पास कोयले का संकट उत्पन्न हो गया. इसका असर उत्पादन पर हुआ. जीएमआर कमलांगा से बिहार को 170 मेगावाट और जिंदल से 128 मेगावाट बिजली कम मिली. इस तरह एनटीपीसी व निजी कंपनियों को मिलाकर बिहार को 1494 मेगावाट बिजली कम मिली.
कोटा से कम बिजली मिलने के कारण दो दर्जन से अधिक ग्रिड को लोडशेडिंग पर रखा गया. आम दिनों में कंपनी 6200 मेगावाट से अधिक बिजली आपूर्ति करती है, लेकिन शुक्रवार को पीक आवर में भी पांच हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति हुई. जब तक एनटीपीसी की सभी इकाइयां चालू नहीं हो जातीं, तब तक लोडशेडिंग का सिलसिला यूं ही जारी रहने के आसार हैं. हालांकि एनटीपीसी के अधिकारियों ने दावा किया कि तकनीकी खराबी को दुरुस्त किया जा रहा है और कभी भी यूनिटों से उत्पादन शुरू हो सकता है.
लोडशेडिंग के बीच ग्रामीण इलाकों में जहां पांच से सात घंटे तक बिजली गुल रही, वहीं शहरी इलाकों में चार-पांच घंटे की बिजली गुल के अलावा ट्रिपिंग की समस्या से लोग हलकान रहे. दिन की तुलना में रात में ट्रिपिंग की समस्या अधिक रही. हर घंटे-दो घंटे पर बिजली की आवाजाही से लोग परेशान रहे. बार-बार फ्यूज कॉल के उड़ने से लोग अंधेरे में रहने को विवश रहे. गर्मी में बिजली की आंखमिचौली से लोगों को भरपूर नींद नहीं आई. गर्मी में एसी व अन्य उपकरणों के चलने से ट्रांसफॉर्मर पर लोड बढ़ गया है. इस कारण ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है.
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