बिहार: खगड़िया में पहला वाहन प्रशिक्षण केंद्र बनकर तैयार, जानें कैसे कम खर्च पर लोगों को मिलेगी ट्रेनिंग

Updated at : 22 Jun 2023 12:15 PM (IST)
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बिहार: खगड़िया में पहला वाहन प्रशिक्षण केंद्र बनकर तैयार, जानें कैसे कम खर्च पर लोगों को मिलेगी ट्रेनिंग

Bihar News: बिहार के खगड़िया जिले में एनएच-31 से सटे मोरकाही में वाहन प्रशिक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है. विभाग से हरी झंडी मिलने के साथ ही यहां लोगों को वाहन का ट्रेनिंग आरंभ हो जाएगा. बता दें कि वर्तमान समय में जिले में एक भी वाहन ट्रेनिंग सेंटर नहीं है.

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Bihar News: बिहार के खगड़िया जिले में एनएच-31 से सटे मोरकाही में वाहन प्रशिक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है. विभाग से हरी झंडी मिलने के साथ ही यहां लोगों को वाहन का ट्रेनिंग आरंभ हो जाएगा. बता दें कि वर्तमान समय में जिले में एक भी वाहन ट्रेनिंग सेंटर नहीं है. यहां से वाहन सिखने के लिए लोगों को दूसरे जिले जाना पड़ता है या फिर अपने हिसाब से लोग मैदान या सड़क पर वाहन चलाने का अभ्यास करते हैं. जिले में वाहन ट्रेनिंग सेंटर संचालित होने के पश्चात लोग कम खर्चे पर सुरक्षित वाहन चलाना सीख पाएंगे. फिलहाल, लोगों को दूसरे जिले में वाहन चलाना सिखने के लिए जाना पड़ता है. इसमें अधिक रूपये खर्च होते है. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा.

प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र लेने में होगी आसानी

यहां छह चक्का से अधिक वाहन का लाइसेंस बनाना अब आसान हो जाएगा. मोरकाही स्थित वाहन प्रशिक्षण केन्द्र पर बाइक से लेकर भारी वाहन (बस-ट्रक) चलाने के गुर सिखाए जाएंगे. जानकारी के मुताबिक इस केन्द्र पर जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिले बेगूसराय व मुंगेर के भी लोग वाहन चलाने का प्रशिक्षण ले सकेंगे. गौरतलब है कि छोटे तथा सामान्य वाहनों (मार्सल, बोलेरे, जीप, कार आदि) के लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ती है. लेकिन, हैवी वाहन के लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग प्रमाण-पत्र की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में हेवी वाहन का लाइसेंस बनाना आसान नहीं है. ट्रक-बस जैसे वाहनों के लाइसेंस के लिए पहले इन वाहनों का प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र की जरूरत पड़ती है.

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परिवहन विभाग से लोगों को मिलेगा लाइसेंस

वर्तमान समय में सिर्फ भारी वाहन के लाइसेंस के लिए लोगों को वाहन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने होते हैं. लेकिन, जिले में वाहन ट्रेनिंग स्कूल खुल जाने के बाद छोटे व मध्यम श्रेणी के वाहनों के लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट देने होंगे. उन्हें वाहन के लाइसेंस दिये जाएंगे. विभागीय आंकड़े के मुताबिक जिले में तकरीबन ढाई हजार लोग प्रत्येक साल वाहन के लाइसेंस बनवाते हैं. ट्रेनिंग स्कूल खुल जाने के बाद नौसिखिये चालक यहां वाहन चलाने के गुर सीखकर परिवहन विभाग से लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे.

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