Bihar News: आंगनबाड़ी बच्चों की ड्रेस से बदलेगी तस्वीर, जीविका दीदियों को 225 करोड़ का काम और लाखों को रोजगार

Updated at : 01 Feb 2026 9:44 AM (IST)
विज्ञापन
Jeevika didis will prepare dresses for children

Jeevika didis will prepare dresses for children

Bihar News: सुई-धागे से बदल रही है गांव की तस्वीर. आंगनबाड़ी बच्चों की ड्रेस सिलते हुए जीविका दीदियां न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार दे रही हैं.

विज्ञापन

Bihar News: बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की यूनिफॉर्म अब जीविका दीदियों के हाथों तैयार हो रही है. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने घोषणा की है कि जीविका दीदियां न केवल आंगनबाड़ी बल्कि भविष्य में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी ड्रेस तैयार करेंगी.

इस विशाल परियोजना से अकेले आंगनबाड़ी क्षेत्र में करीब 225 करोड़ रुपये का टर्नओवर होने का अनुमान है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा. सिलाई की व्यवस्था की गई है, जिससे आने वाले समय में लाखों महिलाओं को स्थायी आय का जरिया मिलेगा.

1.13 लाख केंद्र, करीब 50 लाख बच्चे

राज्य के सभी प्रमंडलों में आंगनबाड़ी और सरकारी स्कूलों के लगभग 50 लाख बच्चों को हर साल दो सेट यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की तैयारी है. फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की ड्रेस जीविका दीदियों द्वारा सिली जा रही है.

मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही सरकारी स्कूलों के बच्चों की पोशाक सिलवाने का फैसला भी लिया जा सकता है.

हर दिन 8 से 10 ड्रेस सिल रहीं दीदियां

वर्ष 2022 में शुरू हुई जीविका दीदी सिलाई घर योजना के तहत राज्य के 15 जिलों में 25 आधुनिक प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र और प्रखंड स्तर पर 1050 सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों पर 45,945 जीविका दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया है.

नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, एक जीविका दीदी प्रतिदिन औसतन 8 से 10 ड्रेस की सिलाई कर रही है.

आधुनिक केंद्रों से बढ़ी क्षमता

जीविका दीदियों की सुविधा के लिए क्लस्टर लेवल फेडरेशन स्तर पर 15 से 20 और केंद्रीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्रों पर 60 से 70 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं.

सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने वाली प्रशिक्षित दीदियां तय लक्ष्य के अनुरूप तेजी से ड्रेस तैयार कर रही हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल

आंगनबाड़ी बच्चों की यूनिफॉर्म सिलाई का जिम्मा जीविका दीदियों को सौंपे जाने से बिहार में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पादन से न सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी.

सरकार का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मॉडल को सरकारी स्कूलों तक विस्तार देने से राज्य में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिलेगा.

Also Read: Bihar Bhumi: बिहार के राजस्व कर्मचारी सीखेंगे अमीन के कामकाज की बारीकियां, ये होगी जिम्मेदारियां

बजट 2026-27 का पूरा शिड्यूल, जानिए कब क्या होगा.
विज्ञापन
Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन