Bihar News: आंगनबाड़ी बच्चों की ड्रेस से बदलेगी तस्वीर, जीविका दीदियों को 225 करोड़ का काम और लाखों को रोजगार
Jeevika didis will prepare dresses for children
Bihar News: सुई-धागे से बदल रही है गांव की तस्वीर. आंगनबाड़ी बच्चों की ड्रेस सिलते हुए जीविका दीदियां न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार दे रही हैं.
Bihar News: बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की यूनिफॉर्म अब जीविका दीदियों के हाथों तैयार हो रही है. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने घोषणा की है कि जीविका दीदियां न केवल आंगनबाड़ी बल्कि भविष्य में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी ड्रेस तैयार करेंगी.
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इस विशाल परियोजना से अकेले आंगनबाड़ी क्षेत्र में करीब 225 करोड़ रुपये का टर्नओवर होने का अनुमान है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा. सिलाई की व्यवस्था की गई है, जिससे आने वाले समय में लाखों महिलाओं को स्थायी आय का जरिया मिलेगा.
1.13 लाख केंद्र, करीब 50 लाख बच्चे
राज्य के सभी प्रमंडलों में आंगनबाड़ी और सरकारी स्कूलों के लगभग 50 लाख बच्चों को हर साल दो सेट यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की तैयारी है. फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की ड्रेस जीविका दीदियों द्वारा सिली जा रही है.
मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही सरकारी स्कूलों के बच्चों की पोशाक सिलवाने का फैसला भी लिया जा सकता है.
हर दिन 8 से 10 ड्रेस सिल रहीं दीदियां
वर्ष 2022 में शुरू हुई जीविका दीदी सिलाई घर योजना के तहत राज्य के 15 जिलों में 25 आधुनिक प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र और प्रखंड स्तर पर 1050 सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों पर 45,945 जीविका दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया है.
नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, एक जीविका दीदी प्रतिदिन औसतन 8 से 10 ड्रेस की सिलाई कर रही है.
आधुनिक केंद्रों से बढ़ी क्षमता
जीविका दीदियों की सुविधा के लिए क्लस्टर लेवल फेडरेशन स्तर पर 15 से 20 और केंद्रीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्रों पर 60 से 70 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं.
सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने वाली प्रशिक्षित दीदियां तय लक्ष्य के अनुरूप तेजी से ड्रेस तैयार कर रही हैं.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
आंगनबाड़ी बच्चों की यूनिफॉर्म सिलाई का जिम्मा जीविका दीदियों को सौंपे जाने से बिहार में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पादन से न सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी.
सरकार का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मॉडल को सरकारी स्कूलों तक विस्तार देने से राज्य में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिलेगा.
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