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बिहार: मोइनुल हक स्टेडियम मेट्रो के निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार, स्टेशन लेने लगा आकार, बिछ रही पटरियां

Updated at : 29 Jul 2023 12:25 PM (IST)
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बिहार: मोइनुल हक स्टेडियम मेट्रो के निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार, स्टेशन लेने लगा आकार, बिछ रही पटरियां

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो के निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. मेट्रो के कोरिडोर -2 का निर्माणाधीन दो मंजिला मोइनुल हक स्टेडियम भूमिगत मेट्रो स्टेशन काम एक कदम और आगे बढ़ चुका है. अब निर्माण काम आकार लेने लगा है.

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Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो के निर्माण का कार्य रफ्तार पकड़ रहा है. मेट्रो के कोरिडोर -2 का निर्माणाधीन दो मंजिला मोइनुल हक स्टेडियम भूमिगत मेट्रो स्टेशन काम एक कदम और आगे बढ़ गया है. निर्माण काम आकार लेने लगा है. स्टेशन पर पटरियां बिछाई जा रही है. बता दें कि यह पटना का भूमिगत और एलिवेटेड पहला मेट्रो स्टेशन है. यह अब आकार लेने लगा है. स्टेशन के पास दो टनल मशीन से खुदाई का काम किया जा रहा है. वहीं, पटना विश्व विद्यालय की ओर 100 मीटर की खुदाई की जा चुकी है.

जमीन की सतह से 18 मीटर नीचे होगा स्टेशन

वहीं, मोईनुल हक स्टेडियम की लंबाई 202 मीटर और चौड़ाई 21 मीटर है. जानकारी के अनुसार यह स्टेशन जमीन की सतह से 18 मीटर नीचे होगा. इसके प्लेटफार्म की लंबाई 140 मीटर है. बता दें कि स्टेशन में दो जगह गेट का निर्माण किया जाएगा. बताया जा रहा है कि एक गेट का निर्माण स्टेशन के अंदर और दूसरे गेट का निर्माण मुख्य सड़क पर किया जाएगा. छह एस्केलेटर के साथ ही स्टेशन में तीन लिफ्ट लगाए जाएंगे. भूमिगत मोइनुल हक स्टेडियम के पास खुदाई का काम जारी है. पटना मेट्रो के कॉरिडोर दो के तहत सभी भूमिगत और एलिवेटेड लाइन का काम जारी है.

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स्टेशन का निर्माण कार्य जारी

कॉरिडोर के पांच एलिवेटेड स्टेशनों के काम को किया जा रहा है. मालूम हो कि टनल की खुदाई का काम सिर्फ मोईनुल हक स्टेडियम स्टेशन से पटना विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन तक किया जा रहा है. आकाशवाणी भूमिगत मेट्रो स्टेशन, राजेंद्र नगर, मोइनुल हक स्टेडियम, पटना विश्वविद्यालय गांधी मैदान, पीएमसीएच मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है.

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टनल बोरिंग मशीन हुआ था लांच

वहीं, इससे पहले मोइनुल हक स्टेडियम से पटना विवि तक पटना मेट्रो भूमिगत खुदाई के लिए जमीन के 16 फुट नीचे टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ” महावीर ” को लांच किया गया था. इसके साथ ही स्टेडियम के भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्य का इनिशियल ड्राइव पूरा हुआ था. इसके बाद टीबीएम ने मेन ड्राइव यात्रा की शुरूआत की. मेट्रो अधिकारियों के अनुसार टीबीएम की सहायता से खुदाई का काम ऑटोमेटिक किया जाएगा. इस कारण समय भी कम लगेगा. वहीं, टीबीएम को विवि तक की शेष दूरी तय कर ब्रेक थ्रू करने में नवंबर-दिसंबर तक का समय लग सकता है. यह दूरी करीब 1.3 किमी की है.

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मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक टनल बोरिंग मशीन विभिन्न हिस्सों में विभाजित हो जाती है. टीबीएम के सबसे आगे वाले भाग के फ्रंट शील्ड में कटिंग हैड होता है. इस कटिंग हैड की मदद से टीबीएम मिट्टी को काटते हुए सुरंग की खुदाई करती है. मेन ड्राइव में इसका ऑटोमेटिक उपयोग किया जाएगा. कटिंग हैड में एक विशेष किस्म के केमिकल के छिड़काव की भी व्यवस्था की गई है, जो कि कटिंग हेड पर लगे नॉजल के द्वारा मिट्टी पर छिड़का जाता है. इस केमिकल की वजह से मिट्टी कटर हैड पर नहीं चिपकती और आसानी से मशीन में लगी कनवेयर बेल्ट की मदद से मशीन के पिछले हिस्से में चली जाती है. यहां से ट्रॉली के जरिए मिट्टी को टनल से बाहर लाकर डंपिंग एरिया में भेजा जाता है.

पटना मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशन अब शक्ल लेते दिखाई देने लगे हैं. स्टेशन अब आकार ले रहा है. स्टेशन पर पटरियां भी बिछाई जा रही है. कुछ दिनों पहले प्रायोरिटी कॉरिडोर यानि मलाही पकड़ी से आइएसबीटी पर आइएसबीटी मेट्रो स्टेशन निर्माण को लेकर पहला यू-गार्डर लांच हुआ था.. यह न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल के पास स्थित है. डीएमआरसी अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि पिलर पर रखे गये पियर कैप पर यू-गार्डर रखे जाते हैं. इन यू-गार्डर पर ही स्टेशन का निर्माण होता है. पटना मेट्रो के निदेशक (कार्य) के मुताबिक चार साल में टनल और पांच साल में स्टेशन का काम पूरा किया जायेगा. मेट्रो के लिए एयरकंडीशनिंग, सिग्निलिंग, ट्रैक, ट्रैक्शन एवं ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट आदि तैयार कर उसे इंटीग्रेट करने में काफी वक्त लगता है. वहीं, पटना के लोगों को मेट्रों का बेस्रबी से इंतजार है. मेट्रो के अधिकारी बताते है कि अधिकारियों के मुताबिक टीबीएम का वजन करीब 60 हाथी के वजन के बराबर है. मेट्रो के अधिकारी बताते है कि अधिकारियों के मुताबिक टीबीएम का वजन करीब 60 हाथी के वजन के बराबर है. पटना की नरम मिट्टी और जमीन के दबाव संतुलन को देखते हुए ही इस टीबीएम का डिजाइन और निर्माण किया गया है. इसका निर्माण सीआरसीएचआइ (चीन रेलवे निर्माण भारी उद्योग निगम लिमिटेड) ने किया है.

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