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Bihar News: विदेशों तक पहुंची बिहार की मीठी क्रांति, करोड़ों में पहुंचा शहद का कारोबार

Updated at : 02 Jan 2026 10:06 AM (IST)
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Bihar News: विदेशों तक पहुंची बिहार की मीठी क्रांति, करोड़ों में पहुंचा शहद का कारोबार

Bihar News: आज बिहार के 20 जिलों में मधुमक्खीपालन से शहद उत्पादन का कारोबार करोड़ों में पहुंच गया है. 90 प्रखंडों में 11 हजार 855 महिलाएं हर वर्ष 10 से 12 करोड़ रुपये तक का शहद उत्पादन का कारोबार कर रही हैं.

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Bihar News: पटना. राज्य में जीविका के माध्यम से देश विदेश में मीठी क्रांति फैल रही है. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि राज्य में हजारों जीविका दीदियां मधुमक्खीपालन से आत्मनिर्भर बनी हैं. इस व्यवसाय से वह ना सिर्फ लाखों की आमदनी कर रही हैं, बल्कि बिहार में तैयार मीठे शहद के स्वाद को देश-विदेश तक पहुंचा रही हैं. शहद उत्पादन की यह मीठी क्रांति ग्रामीण विकास विभाग के जीविका समूह से जुड़ने के बाद राज्य में संभव हो पायी है. जीविका दीदियों के हाथों शहद उत्पादन के इस व्यवसाय से ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली आयी है. महिलाओं के हाथों को घर बैठे रोजगार मिला है.

मुख्य बातें

  • बिहार में करीब 12 हजार महिलाएं हैं शहद उत्पादन में दक्ष
  • अलग-अलग फ्लेवर के शहद लोगों को आ रहा पसंद
  • दूसरे राज्यों के साथ विदेशों में भी हो रहा निर्यात

मुजफ्फरपुर जिले से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

2009 में राज्य के मुजफ्फरपुर जिले से पायलट प्रोजेक्ट के तहत जीविका की महिलाओं ने मधुमक्खीपालन का शुभारंभ किया. शुरुआती कुछ वर्षों तक उनका यह व्यवसाय लाखों में था लेकिन, आज राज्य के 20 जिलों में मधुमक्खीपालन से शहद उत्पादन का कारोबार करोड़ों में पहुंच गया है. 90 प्रखंडों में 11 हजार 855 महिलाएं हर वर्ष 10 से 12 करोड़ रुपये तक का शहद उत्पादन का कारोबार कर रही हैं. इससे प्रति महिला महीने में करीब 10 हजार रुपये तक की आर्थिक आमदनी घर बैठे आसानी से हो जा रही है.

हिमाचल प्रदेश की कंपनी करती है प्रोसेसिंग व पैकेजिंग

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि राज्य में जीविका दीदियों के हाथों शहद उत्पादन का काम काफी तेजी से बढ़ रहा है. महिलाओं के हाथों तैयार यह शहद हिमाचल प्रदेश की कंपनी में प्रोसेसिंग व पैकेजिंग लिए जाता है. इसके बाद यह शहद देश के दूसरे राज्य और विदेशों में भी निर्यात किया जा रहा है. महिलाओं को मधुमक्खीपालन के सहारे शहद उत्पादन का व्यवसाय मिल जाने से उनकी आर्थिक सशक्तीकरण का सहज रास्ता तैयार हो गया है. सरकार की यह पहल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेजी से मजबूत कर रही है. साथ ही महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. जीविका दीदियों के हाथों मधुमक्खीपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार के लिए एक बेहतरीन जरिया है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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