बिहार में अब जीविका दीदियां बनाएंगी इंडक्शन चूल्हा, 7 हजार महिलाओं को IIT के एक्सपर्ट देंगे ट्रेनिंग

जीविका दीदियां बनाएंगी इंडक्शन चूल्हा
Bihar Jeevika : बिहार की जीविका दीदियां अब सिर्फ सोलर प्लेट और बल्ब बनाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इंडक्शन चूल्हा भी तैयार करेंगी. राज्य सरकार ने 7 हजार महिलाओं को ट्रेनिग देने की योजना बनाई है.
Bihar Jeevika : बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जीविका दीदियां अब तकनीक के क्षेत्र में एक और ऊंची छलांग लगाने जा रही हैं. सोलर प्लेट और एलईडी बल्ब बनाने के बाद, अब राज्य की सात हजार जीविका दीदियां ‘इंडक्शन चूल्हा’ तैयार करेंगी.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में गैस की किल्लत को दूर करना और महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है. जीविका वुमेन इनिशिएटिव फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड (गयाजी) को इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
IIT के इंजीनियर सिखाएंगे हुनर
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी रूप से एक्सपर्ट बनाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मुंबई और IIT दिल्ली के इंजीनियर्स ट्रेनिग देंगे.
जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा के अनुसार, उन दीदियों को चिह्नित किया जा रहा है जिनमें व्यवसायिक समझ और इंजीनियरिंग के प्रति रुचि हो. इस ट्रेनिंग के बाद ये महिलाएं केवल श्रमिक नहीं, बल्कि कुशल तकनीशियन के रूप में उभरेंगी, जिससे उनकी मासिक आय भी बढ़ेगी.
2020 से शुरू हुआ था बदलाव का सफर
‘स्वच्छ ऊर्जा-सशक्त महिला’ के विजन के साथ 6 जनवरी 2020 को गयाजी में एक विशेष कंपनी का गठन किया गया था. इस कंपनी से अब तक 7,000 से अधिक दीदियां जुड़ चुकी हैं. पहले ये महिलाएं सोलर लैंप और प्लेट्स बनाकर पूरे बिहार में सप्लाई कर रही थीं, लेकिन अब इंडक्शन चूल्हा निर्माण के जरिए ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखेंगी.
गांव की रसोई में पहुंचेगी स्वच्छ ऊर्जा
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर रसोई गैस की उपलब्धता महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जीविका द्वारा निर्मित इंडक्शन चूल्हा न केवल बाजार से सस्ता होगा, बल्कि गांव के स्तर पर ही मरम्मत और सर्विसिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा.
बिहार दिवस के मौके पर गांधी मैदान में लगे स्टॉल पर इन चूल्हों की भारी मांग देखी गई, जहां महज तीन दिनों में 10 चूल्हे बिक गए और दर्जनों की एडवांस बुकिंग हुई. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. आने वाले समय में यह बाजार से सस्ते विकल्प के रूप में उपलब्ध हो सकता है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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