ePaper

बिहार चुनाव 2020: औरंगाबाद की छह सीटों पर 79 प्रत्याशी, राजनीतिक साख के बीच लड़ाई को रोचक बना रहे बागी

Updated at : 22 Oct 2020 8:16 AM (IST)
विज्ञापन
बिहार चुनाव 2020: औरंगाबाद की छह सीटों पर 79 प्रत्याशी, राजनीतिक साख के बीच लड़ाई को रोचक बना रहे बागी

बिहार चुनाव 2020: पहले चरण में 28 अक्तूबर को होनेवाले विस चुनाव को लेकर औरंगाबाद जिले में सरगर्मी चरम पर है.

विज्ञापन

पहले चरण में 28 अक्तूबर को होनेवाले विस चुनाव को लेकर औरंगाबाद जिले में सरगर्मी चरम पर है. यहां प्रमुख रूप से राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाने और पुरानी साख पाने का संघर्ष है. जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं. इस चुनाव में कई ऐसे प्रत्याशी हैं, जिनकी प्रतिष्ठा दावं पर है.

वहीं, कुछ निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर कर लड़ाई को रोचक बना रहे हैं. गौरतलब है कि कुछ उम्मीदवार पार्टियों से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय के रूप में ताल ठोंक रहे हैं और प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के समक्ष चुनौती पेश कर रहे हैं. जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 1810700 है. इनमें 964789 पुरुष व 845845 महिला मतदाता हैं.

औरंगाबाद

औरंगाबाद विस सीट सबसे हॉट मानी जाती है. ऐसा इसलिए कि इस जगह से बिहार की राजनीति में अहम व अलग पहचान रखनेवाले राजनेताओं का नाम जुड़ा है. इस चुनाव में एनडीए प्रत्याशी के रूप में भाजपा की ओर से रामाधार सिंह व कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शंकर सिंह के बीच कड़ा मुकाबला है.

हालांकि, इस बीच राजद छोड़ बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अनिल कुमार इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं. भाजपा प्रत्याशी रामाधार सिंह पहले चार बार विधायक रह चुके हैं. 2010 में जीत के बाद सूबे में सहकारिता मंत्री भी बने थे. 2015 में कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शंकर सिंह ने इन्हें मात दी. निवर्तमान विधायक सह कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शंकर सिंह इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने, तो पूर्व मंत्री रामाधार सिंह अपनी पुरानी साख फिर से पाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

कुटुंबा

कुटुंबा (सुरक्षित) विस सीट की लड़ाई भी काफी रोचक है. यहां कुल 14 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. निवर्तमान विधायक राजेश राम कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं, जबकि एनडीए समर्थित हम उम्मीदवार श्रवण कुमार पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

वैसे तो इन दोनों प्रत्याशियों के बीच ही सीधी टक्कर होती, लेकिन तब जब जदयू छोड़ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ललन भुइंया चुनावी मैदान में नहीं होते. ललन भुइंया 2010 में कुटुंबा विधानसभा से जदयू से विधायक रह चुके हैं. 2015 में राजद-जदयू के गठबंधन से यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गयी थी, जिसके कारण इन्हें टिकट से वंचित होना पड़ा था.

गोह

गोह विस क्षेत्र कभी सीपीआइ का मजबूत स्तंभ रहा है. उसके बाद यहां जदयू का कब्जा रहा,लेकिन 2015 में इस सीट पर भाजपा के मनोज कुमार ने तब महागठबंधन के सहयोगी रहे जदयू उम्मीदवार डॉ रणविजय कुमार को हराया था.

इस बार जदयू-भाजपा एक साथ एनडीए में हैं . इन दोनों पार्टियों के आ जाने से इस सीट पर राजद की चुनौती बढ़ी है. हालांकि, राजद के लिए राहत की बात यह है कि महागठबंधन में कांग्रेस व वामपंथी पार्टियां शामिल हैं. पिछले पांच चुनावों की बात करें, तो इस सीट पर एक बार समता पार्टी, लगातार तीन बार जेडीयू और एक बार भाजपा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है.

इस विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से 17 उम्मीदवार मैदान में हैं. जदयू से विधायक रहे रणविजय कुमार इस बार रालोसपा से चुनावी मैदान में हैं.चर्चा के अनुसार यहां सीधा मुकाबला भाजपा उम्मीदवार मनोज कुमार और महागठबंधन के राजद उम्मीदवार भीम कुमार सिंह के बीच है. हालांकि, रालोसपा प्रत्याशी सह पूर्व विधायक डॉ रणविजय कुमार इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं.

नवीनगर

नवीनगर विस सीट पर सबसे अधिक कड़ा संघर्ष दिख रहा है. मुख्य मुकाबला जदयू व राजद के उम्मीदवारों में है. 2010 से लगातार विधायक रहे वीरेंद्र कुमार सिंह इस बार भी जदयू की ओर से मैदान में हैं,जबकि पूर्व विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्ल्यू सिंह को राजद ने मैदान में उतारा है. इसी विस सीट से चुनाव लड़ कर बिहार विभूति डॉ अनुग्रह नारायण सिन्हा वित्त मंत्री, तो इनके पुत्र छोटे साहब के नाम से विख्यात सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने जीत हासिल कर मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया था.

रफीगंज

रफीगंज विस क्षेत्र से कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं. जदयू की ओर से निवर्तमान विधायक अशोक कुमार सिंह, तो राजद के टिकट से मो नेहालुद्दीन हैं. अशोक कुमार सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं और तीसरी बार जीत हासिल करने की जद्दोजहद में हैं.

वहीं, राजद प्रत्याशी नेहालुद्दीन 2005 में जीत हासिल कर इसी सीट से विधायक बने थे. साथ ही 2015 में दूसरे स्थान पर रहे प्रमोद कुमार सिंह इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दमखम दिखा रहे हैं. वह कांग्रेस से इस क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाह रहे थे.

ओबरा

ओबरा से कुल 10 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. राजद जहां अपनी जीत के रिकॉर्ड को बरकरार रखने के प्रयास में है, तो वहीं लोजपा अपने आधार वोटों के अलावा अन्य लोगों के सहारे जीत की जुगत में है. जदयू अतिपिछड़ा वोट के साथ-साथ जदयू-भाजपा के आधार वोटों पर नजर गड़ाये हुए है. रालोसपा को अपने आधार के अलावा बसपा के वोटों की उम्मीद है.

प्रमोद सिंह चंद्रवंशी के निर्दलीय चुनाव मैदान में आने के बाद वोटों के बिखराव की संभावना की चर्चा है. वहीं, एनडीए की ओर से सुनील यादव पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. राजद से पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति के पुत्र ऋषि यादव भी पहली बार मैदान में हैं. उधर, लोजपा से डॉ प्रकाश चंद्रा भी पहली बार भाग्य आजमा रहे हैं. वहीं, इस सीट से दो बार जदयू से चुनाव लड़े प्रमोद चंद्रवंशी इस बार निर्दलीय लड़ाई को रोचक बना रहे हैं.

Posted by Ashish Jha

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन