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Bihar Chunav 2020 : पहले पार्टी समर्थित कार्यकर्ता होते थे प्रत्याशी, जानें कब से बदला पैर्टन

Updated at : 12 Oct 2020 12:11 PM (IST)
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Bihar Chunav 2020 : पहले पार्टी समर्थित कार्यकर्ता होते थे प्रत्याशी, जानें कब से बदला पैर्टन

Bihar Chunav 2020 : 1980 से प्रत्याशी के चयन में धनबल व बाहुबल ने इसमें अपना विशाल रूप ले लिया.

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लखीसराय : आजादी के बाद 1952 से लेकर 1969 तक विधानसभा चुनाव में समर्पित कार्यकर्ता को विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रत्याशी बनाया जाया करता था. समर्पित कार्यकर्ता सत्तू, चुड़ा, मिठ्ठा लेकर क्षेत्र में मतदाताओं से वोट मांगते थे. 1972 विधानसभा चुनाव से पैर्टन में बदलाव होने लगा और 1980 से प्रत्याशी के चयन में धनबल व बाहुबल ने इसमें अपना विशाल रूप ले लिया.

अब तो विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को छोड़कर आने वाले दलबदलू, धनबली व बाहुबली नेताओं को विभिन्न पार्टियों द्वारा टिकट देना प्रारंभ कर दिया. वहीं समर्पित कार्यकर्ता पर्दे के पीछे रह गये और अभिकर्ता अपराधी आगे हो गये. जिसके कारण नेताओं की तरह कार्यकर्ताओं का भी कोई सिद्धांत नहीं रहा. जिसके कारण बड़ी तेजी से जीत कर बने जनप्रतिनिधि ऊपर जाकर पार्टी छोड़कर इस पार्टी से उस पार्टी में पाला बदलने लगे.

वहीं कार्यकर्ता भी चुनाव में राशि लेकर इधर से उधर भटकने लगे. पुराने राजनीति टीकाकारों की मानें तो आजादी के बाद 1952 से विधानसभा चुनाव प्रारंभ हुआ. उस समय विभिन्न पार्टियां समर्पित कार्यकर्ता को पार्टी प्रत्याशी बनाते थे. वहीं समर्पित कार्यकर्ता सिद्धांत आधारित अपने अपने प्रत्याशी के तरफ से पैसा पर नहीं बल्कि सत्तू, चुड़ा, मिठ्ठा लेकर पैदल क्षेत्र में भ्रमण कर मतदाताओं से वोट मांगा करते थे. हालांकि उस समय भी अपने अपने पार्टी में भीतरी घात होता था, लेकिन खुलकर नहीं.

यह सिलसिला 1969 तक चला 1972 विधानसभा चुनाव से धनबल का महत्व शुरू हुआ तथा 1980 विधानसभा चुनाव से इसने विशाल रूप ले लिया. जिसको लेकर प्रत्याशी कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं कर बाहुबलियों पर भरोसा करने लगे. अब तो स्थिति कहने का कार्यकर्ता है पर्दे के पीछे रह गये हैं. समर्पित कार्यकर्ता नहीं बल्कि अभिकर्ता वोट के ठेकेदार बन गये हैं.

जमीनी कार्यकर्ताओं पर्दा के पीछे रह गया है. इतना ही नहीं समर्पित कार्यकर्ता को प्रत्याशी नहीं बनाकर धनवंतरी, बाहुबली नेताओं को जब से विभिन्न पार्टियों प्रत्याशी बनाना शुरू किया तब से कार्यकर्ता भी समर्पित सिद्धांत छोड़कर चुनाव के वक्त पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी बनकर खड़ा होना या दूसरे पार्टी से प्रत्याशी बनना आम बात हो गयी है.

Posted by Ashish Jha

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