बिहार विधानसभा चुनाव 2020: गांधी जयंती के दिन सोनिया गांधी के कार्यक्रम का शंखनाद, जानें चंपारण से चुनावी बिगुल फूंकने के क्या हैं मायने...

बिहार विधानसभा चुनाव 2020,पटना. महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को चंपारण से बिहार चुनाव के दौरान अपने कार्यक्रम का शंखनाद करेंगी. चंपारण को राजनीति का संपूर्ण पाठशाला माना जाता है. विपक्ष के द्वारा केंद्र की सत्ता से कई मुद्दों पर असहमति जताने के माहौल में बिहार चुनाव के तारीखों की घोषणा के बाद गांधी जयंती के दिन रखे इस कार्यक्रम के कइ मायने निकाले जा सकते हैं. चंपारण से ही भारत समेत पूरे विश्व को शांतिपूर्ण असहमति , आंदोलन व सत्याग्रह जैसे औजार मिले हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव 2020,पटना. महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को चंपारण से बिहार चुनाव के दौरान अपने कार्यक्रम का शंखनाद करेंगी. चंपारण को राजनीति का संपूर्ण पाठशाला माना जाता है. विपक्ष के द्वारा केंद्र की सत्ता से कई मुद्दों पर असहमति जताने के माहौल में बिहार चुनाव के तारीखों की घोषणा के बाद गांधी जयंती के दिन रखे इस कार्यक्रम के कइ मायने निकाले जा सकते हैं. चंपारण से ही भारत समेत पूरे विश्व को शांतिपूर्ण असहमति , आंदोलन व सत्याग्रह जैसे औजार मिले हैं.
गौरतलब है कि सोनिया गांधी आज शुक्रवार को पूर्वी चंपारण में जिला कांग्रेस कमेटी मुख्यालय परिसर, बंजरिया पंडाल आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण करेंगी. अनावरण कार्यक्रम दोपहर 1.00 बजे होगा. साथ ही वह जूम के माध्यम से कांग्रेसजनों और अन्य लोगों को संबोधित करेंगी. इस अवसर पर 151 स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को भी सोनिया गांधी वर्चुअली सम्मानित करेंगी और उनको प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा. प्रतिमा की स्थापना महात्मा गांधी प्रतिमा स्थापना एवं संरक्षण समिति, पूर्वी चंपारण द्वारा किया गया है. कार्यक्रम में पटना सदाकत आश्रम से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ मदन मोहन झा की अध्यक्षता में कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं कार्यकर्ता भी शामिल होंगे.
चंपारण की भूमि को गांधी के सत्याग्रह के लिए जाना जाता है. कभी यहीं से शुरू किए सत्याग्रह ने गांधी को महात्मा के रूप में जाना. मुद्दा चाहे किसान चेतना, अहिंसा, सफाई, की हो या सत्याग्रह की, चंपारण इन सभी के लिए एक उदाहरण के रूप में जाना जाता है.1916 ई. के लखनऊ के कांग्रेस सम्मेलन में बिहार के राजकुमार शुक्ल ने गांधी से संपर्क किया और चंपारण चलने का आग्रह किया. जिस दौर में ब्रिटिश सरकार ने परंपरागत भारतीय खेती को खत्म करने का अभियान चला रखा था. वो किसानों को यूरोपीय बाजारों के अनुसार खेती करने पर किसानों को मजबूर कर रहे थे. टैक्स, जिरात व तिनकठिया प्रणाली के साथ ही किसानों के उपर बर्बरता की सारी हदें पार की जा रही थी. गांधी ने स्वयं चंपारण जाकर हालात का प्रत्यक्ष जायजा लिया और अंग्रेजों के खिलाफ मजबूती से इन मुद्दों पर किसानों के साथ खड़े होकर लडे.
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गांधीजी के निरंतर प्रयासों के बाद जांच कमिटी गठित कर तीनकठिया प्रणाली को रद्द किया गया. वहीं चंपारण एग्रेरियन बिल पर गवर्नर जनरल के हस्ताक्षर के साथ ही अन्य काले बिल भी रद्द हुए थे.
आज के राजनीति में जहां गांधी को अपना बनाने की होड़ लगी हुई है, उस दौरान देश में किसानों के मुद्दे, राज्य सरकारों के साथ कई मुद्दों पर असहमति के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का बिहार के चुनावी दौर में गांधी जयंती के दिन चंपारण से अपने कार्यक्रम को शूरू करना बेहद दिलचस्प है.
Posted By: Thakur Shaktilochan Shandilya
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