विश्व नशा निषेध दिवस पर कहलगांव न्यायालय परिसर में जागरूकता अभियान
नशा मुक्ति की शपथ लेते हुए
World No Tobacco Day: विश्व नशा निषेध दिवस के अवसर पर कहलगांव व्यवहार न्यायालय परिसर में अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन कर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया गया.
मुख्य बातें:
कहलगांव (भागलपुर) से रिपोर्ट
World No Tobacco Day: अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर कहलगांव अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार (Sub-Divisional Legal Services Committee) की ओर से व्यवहार न्यायालय परिसर में एक वृहद विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता अवर न्यायाधीश सह अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने की. शिविर के दौरान न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियर (PLV) और अदालती कर्मचारियों ने एकजुट होकर जीवन में कभी भी नशा न करने और समाज को नशा मुक्त बनाने की सामूहिक शपथ ली.
1987 से हो रहा है आयोजन, युवाओं में बढ़ती लत पर चिंता
अदालत परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ऐतिहासिक संदर्भ: अपने मुख्य संबोधन में प्राधिकार के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वर्ष 1987 में प्रप्रथमा 26 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस’ के रूप में घोषित किया था. इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के समाजों को नशीले पदार्थों के घातक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उनके अवैध वैश्विक व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाना है.
- नशे का बदलता स्वरूप: उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज नशा सिर्फ चुनिंदा ड्रग्स तक सीमित नहीं रह गया है. आधुनिक दौर में शराब, तंबाकू, गुटखा और सिगरेट के साथ-साथ कई तरह के सिंथेटिक नशीले पदार्थ युवाओं और स्कूली बच्चों को अपनी चपेट में ले रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है.
न्यायाधीश ने उपस्थित जनसमुदाय और कानूनी बिरादरी से पुरजोर आग्रह किया कि वे स्वयं को इस सामाजिक बुराई से दूर रखें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके खिलाफ जागरूक करने के लिए प्रेरित करें.
World No Tobacco Day: न्यायिक और प्रशासनिक अमले की रही सक्रिय मौजूदगी
प्राधिकार के पदाधिकारियों ने बताया कि नशा न सिर्फ किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को तबाह करता है, बल्कि यह समाज में होने वाले कई तरह के घरेलू और आपराधिक मामलों की मुख्य वजह भी है. इसलिए कानूनी साक्षरता के जरिए लोगों को इसके प्रति सचेत करना बेहद जरूरी है.
इस महत्वपूर्ण अवसर पर न्यायालय के कई पैनल अधिवक्ता, पीएलवी मनीष पांडेय, नाजिर संजय कुमार, प्रवीण कुमार, ओमशरण, विनोद कुमार, सौरभ कुमार सहित भारी संख्या में अदालती कर्मचारी और स्थानीय वादी-प्रतिवादी मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में सभी कर्मियों ने नशा विरोधी बैनर और पोस्टरों के साथ आम जनता के बीच जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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