सती बिहुला की जन्मस्थली उजानी आज भी अपनी पहचान का इंतजार कर रही, सात ऐतिहासिक पोखर बने उपेक्षा की कहानी

Updated:
विज्ञापन
गोपालपुर  सती बिहुला की स्थापित प्रतिमा का फोटो | Prabhat Khabar Network

गोपालपुर सती बिहुला की स्थापित प्रतिमा का फोटो | Prabhat Khabar Network

Bhagalpur News: भागलपुर का उजानी गांव सती बिहुला की जन्मस्थली के रूप में विख्यात है. यह स्थान बिहार की प्रसिद्ध बिहुला–विषहरी लोकगाथा का केंद्र है. उपेक्षा का शिकार यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटन के रूप में विकसित होने की राह देख रहा है.

विज्ञापन

Bhagalpur News: भागलपुर जिले के गंगा पार गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र का उजानी गांव केवल एक गांव नहीं, बल्कि बिहार की लोक आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार यही गांव सती बिहुला की जन्मस्थली यानी मायका है. सदियों से यह स्थान प्रसिद्ध बिहुला-विषहरी लोकगाथा और मंजूषा कला की परंपरा का अहम केंद्र रहा है. बावजूद इसके, आज यह ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण और विकास की राह देख रही है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस स्थल का वैज्ञानिक संरक्षण कर इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन से जोड़ा जाए तो उजानी बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है. इससे न केवल लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.

लोक आस्था में खास स्थान रखती है सती बिहुला की कथा

जनश्रुतियों के अनुसार भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा विषहरी को पृथ्वी पर पूजा दिलाने के उद्देश्य से सती बिहुला का जन्म उजानी गांव में हुआ था.

बाद में उनका विवाह चंपानगर के प्रसिद्ध व्यापारी चंद्र सौदागर के पुत्र बाला लखिंदर से हुआ. लोककथा के अनुसार विवाह की पहली रात ही कालनागिनी के डंसने से लखिंदर की मृत्यु हो गई.

इसके बाद बिहुला ने अपने पति के शव को केले के थंभों से बनी मंजूषा (नाव) पर रखकर चंपा नदी के रास्ते देव लोक की यात्रा की. उनकी अटूट निष्ठा, तपस्या और साहस से प्रसन्न होकर देवताओं ने लखिंदर सहित पूरे परिवार को पुनर्जीवन प्रदान किया.

यही लोककथा आज भी बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लोकगीतों, मंजूषा चित्रकला और लोक परंपराओं के माध्यम से जीवंत है.

सात ऐतिहासिक पोखर आज भी संजोए हुए हैं विरासत

उजानी गांव में आज भी सती बिहुला की स्मृतियों से जुड़े सात ऐतिहासिक पोखर मौजूद हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इन तालाबों का संबंध बिहुला के समय से है और ये गांव की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

हालांकि समय के साथ इन पोखरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. उचित संरक्षण और देखरेख के अभाव में यह विरासत धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती जा रही है.

Bhagalpur News: पर्यटन के रूप में विकसित होने की अपार संभावना

सती बिहुला के उपासक विमल पोद्दार सहित ग्रामीण लंबे समय से इन ऐतिहासिक पोखरों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन स्थल के रूप में विकास की मांग कर रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार इस क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट से जोड़ दे तो यहां देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच सकते हैं. इससे स्थानीय हस्तशिल्प, मंजूषा कला, छोटे कारोबार और पर्यटन आधारित रोजगार को भी नई गति मिलेगी.

संरक्षण नहीं हुआ तो खो सकती है ऐतिहासिक पहचान

स्थानीय लोगों का मानना है कि उजानी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बिहार की लोक संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर है. यदि समय रहते यहां संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक विरासत से वंचित हो सकती हैं.

ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि उजानी गांव की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए, सातों पोखरों का जीर्णोद्धार कराया जाए और इसे राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाए.

Also Read: हाजीपुर से चिराग पासवान ने कर दिया ऐलान, यूपी की सभी 403 सीटों पर उतारेंगे उम्मीदवार

Also Read: पटना नहीं, अब राजगीर इंटरनेशनल स्टेडियम में चौके-छक्के लगाएंगे बिहार के रणजी धुरंधर, 11 अक्टूबर को पहला मुकाबला


विज्ञापन
Vipin Thakur

लेखक के बारे में

By Vipin Thakur

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन