जिले के अधिकतर स्थानों पर उदया तिथि के अनुसार गुरुवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया गया, जबकि पारंपरिक तरीके से कुछेक स्थानों पर भी बुधवार को भी मनाया गया था. सुबह से ही बरारी सीढ़ी घाट, एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट, मुसहरी घाट, पुल घाट आदि पर श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगायी. श्रद्धालु गंगा तट पर स्नान करने के बाद दीप प्रज्वलित कर गंगा में दीपदान कर रहे थे. कई स्थानों पर दरिद्र नारायण के लिए भोज, तो कहीं सामूहिक भोज, तो जरूरतमंदों के बीच कई श्रद्धालु कंबल, पैसे, तिल, चूड़ा व अंग वस्त्र दान कर रहे थे. बूढ़ानाथ, शिव शक्ति मंदिर, कुपेश्वर नाथ, भूत नाथ आदि मंदिरों में भी प्रात: से ही पूजा करनेवाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. चारों तरफ मकर संक्रांति का उल्लास दिखा.
बूढ़ानाथ मंदिर में हुआ सामूहिक सुंदरकांड का पाठ
बूढ़ानाथ मंदिर में महंत शिवनारायण गिरि के संचालन में सामूहिक सुंदरकांड का पाठ कराया गया. प्रबंधक वाल्मिकी सिंह के संचालन में सामूहिक भोज का आयोजन हुआ. सुबह दही-चूड़ा व अन्य व्यंजन एवं रात्रि में खिचड़ी का भोज हुआ. वहीं शिव शक्ति मंदिर में महंत अरुण बाबा के संचालन में दही-चूड़ा व अन्य व्यंजन का भोज कराया गया.
बाजार में तिलकुट, तिलवा, लाई, दही, कतरनी चूड़ा, गुड़, फूल गोभी, मटर, टमाटर एवं पतंग खरीदने वालों की भीड़ उमड़ी. इससे लाखों का कारोबार हुआ. चूड़ा व्यवसायी चंदन विश्वास ने बताया कि एक दिन पहले 20 क्विंटल कतरनी चूड़ा का कारोबार हुआ. आज भी 10 क्विंटल से अधिक चूड़ा का कारोबार हुआ. बाजार में स्टॉक की कमी से 150 रुपये किलो कतरनी चूड़ा बिका. दही विक्रेता नंद किशोर साह ने बताया कि सुबह से ही दही लेने के लिए लाइन लग गयी थी. 120 रुपये किलो तक दही बिके. कहीं-कहीं दही विक्रेता इससे अधिक दाम पर भी दही की कमी का हवाला देकर बेच रहे थे.
पापहरणी में स्नान करने लोग गये मंदार हिल
मकर संक्रांति पर भगवान मधुसूदन की पूजा-अर्चना करने व पापहरणी तालाब में स्नान करना शुभ मानते हुए जिले के सैकड़ों लोग मंदार हिल पैसेंजर ट्रेन या बौंसी जाने वाली अन्य गाड़ियों से भी मंदार पहाड़ी पहुंचे. कई स्थानों पर युवाओं की टोली ने पिकनिक जैसा दही-चूड़ा, तिलकुट, तिलवा व लाई का भोजन किया और पतंग उड़ा कर मस्ती की. लाजपत पार्क में स्थानीय पार्षद नंदिकेश शांडिल्य के नेतृत्व में युवाओं ने पतंगबाजी की. इसमें श्रेष्ठ पतंगबाजों को पुरस्कृत किया गया. अधिकांश लोग परिवार के साथ मिल कर घर में ही अपने इस्ट देव की पूजा-अर्चना के बाद साथ मिल कर मकर संक्रांति का व्यंजन दही चूड़ा, तिलकुट, तिलवा, लाई व विभिन्न प्रकार की सब्जी का आनंद लिया.
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