bhagalpur news. हमें जीवन जीना सिखाता है रंगमंच : डॉ चैतन्य

Author Atul kumar
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bhagalpur news. हमें जीवन जीना सिखाता है रंगमंच : डॉ चैतन्य

आलय की ओर से कला केंद्र में गुरुवार को विश्व रंग मंच दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया

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भागलपुर

आलय की ओर से कला केंद्र में गुरुवार को विश्व रंग मंच दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. शशि शंकर ने कहा कि जन्म से ही मनुष्यों में अभिनय का गुण नैसर्गिक रूप में मौजूद रहता है. शिशु अपने हाव भाव के द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है. डॉ चैतन्य प्रकाश ने कहा कि रंगमंच हमें जीवन जीना सिखाता है, सहजता सिखाता है. अभिनय एक ऐसी विद्या है जिसे लंबी साधना से और विभिन्न संस्थानों में प्रवेश लेकर सीखा जा सकता है. आलोक राज ने कहा कि रंगमंच ने ही मुझे सही दिशा दी है. मिथिलेश ने कहा कि आज के इस आधुनिक दौर में मनोरंजन के साधनों में मोबाइल हमें हर क्षण प्रभावित कर रहा है. ऐसे में रंगमंच स्वस्थ सामाजिक ज्ञानवर्धक मनोरंजन दे सकता है. श्वेता शंकर ने कहा कि रंगमंच ने ही मुझे सलीका सिखाया खासकर रंगमंच में महिलाओं जरूर जुड़ना चाहिए. राहुल राजीव ने कहा कि रंगमंच एक जीवंत विद्या है. इसका सीधा और स्पष्ट प्रभाव पड़ता है यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि संदेश प्रधान माध्यम है. गोष्ठी के के अंत में प्रसिद्ध रंगमंच के मशहूर कलाकार एवं मध्य प्रदेश राज्य नाट्य विद्यालय, भोपाल के पूर्व निदेशक आलोक चटर्जी को रंगकर्मियों के द्वारा दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गयी. संगोष्ठी में झुग्गी बस्ती के बच्चों ने भी हिस्सा लिया और अपने नाटक, गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी. इस मौके पर विपुल, मिथिलेश, मंगलम, मोनाल, शीतलम, सागर, शिवम, महेंद्र, मंगलम, गौरव सिंह राठौर, विक्रम, अमित, कोमल, बजरंगी, सोनी कुमारी, प्रीति, रागिनी, सूरज, साहिल, आर्यन, शिवम, राजकुमार आदि उपस्थित थे.

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