bhagalpur news. सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराने व कीमती दवा खरीदने में हो रही परेशानी

Updated at : 26 May 2025 12:46 AM (IST)
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bhagalpur news. सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराने व कीमती दवा खरीदने में हो रही परेशानी

टीएमबीयू में पेंशनरों का दर्द एक के बाद एक सामने आ रहा है.

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भागलपुर टीएमबीयू में पेंशनरों का दर्द एक के बाद एक सामने आ रहा है. पेंशन का एरियर, ग्रेच्यूटी, सातवां वेतनमान के वेतनांतर, ग्रुप इंश्योरेंस, शिक्षक कल्याण राशि सहित अन्य सेवांतलाभ का भुगतान नहीं होने से पेंशनरों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है.

टीएनबी लॉ कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो कमल किशोर चौधरी गंभीर बीमारी से ग्रसित है. उन्होंने बताया कि उनको सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराना होता है. कीमती दवा खरीदना पड़ रहा है. बताया कि पैसे के अभाव के कारण इलाज भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है. सेवांतलाभ को लेकर करीब 22 लाख रुपये विवि से अबतक भुगतान नहीं किया गया है. पेंशन का एरियर, ग्रेच्यूटी, सातवां वेतनमान के वेतनांतर, ग्रुप इंशोरेंस, शिक्षक कल्याण राशि सहित अन्य मद में बकाया है. वेतन कोषांग से पर्ची देने के बाद भी पेंशन का भुगतान 100 फीसदी नहीं किया गया है. उनका पेंशन कितना प्रतिशत काट कर दिया जा रहा है, इसकी भी जानकारी नहीं दिया गया है. बीमारी के कारण अब चलने में परेशानी होती है. ऐसे में विवि जाना तक छोड़ दिया है.

सेवानिवृत्त होने के बाद विवि में दिया आवेदन, नहीं हुई सुनवाई

प्रो कमल किशोर चौधरी ने बताया कि लॉ कॉलेज से वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे. बकाया सेवांतलाभ को लेकर कई बार आवेदन दिये, अधिकारियों व संबंधित कर्मचारियों से मिले. वर्ष 2024 में ही मामले में विवि में आवेदन दिये. इसी बीच स्वास्थ्य खराब हो गया. विवि आने-जाने में परेशानी होने लगी. पूर्णिया स्थित अपने मूल घर में आकर रहने लगा. यहां ही सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस चल रहा है.

विवि के लिए ईमानदारी से किया काम

लॉ कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो कमल किशोर चौधरी ने बताया कि कॉलेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई कराता था. साथ में विवि से रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेवारी भी सौंपी गयी थी. बताया कि लॉ के चार सत्र व बीएड का रिजल्ट भी तैयार करते थे. विवि के लिए ईमानदारी से काम किया, लेकिन विवि ने मेरी सेवा को भूला दिया. विवि से मांग की है कि उनका बकाया सेवांतलाभ राशि उपलब्ध करा दें, ताकि इलाज बेहतर ढंग से करा सकें.

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