पावन गंगा में सीधे गिराया जा रहा कचरा: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर सामने आई बड़ी लापरवाही, कैमरे में कैद हुआ गंदा खेल

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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु से गंगा नदी में सीधे कचरा फेंके जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. करोड़ों रुपये के सफाई अभियानों पर सवाल उठ रहे हैं. वायरल वीडियो ने इस गंदे खेल को उजागर कर दिया है.

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Vikramshila Setu Garbage Ganga Pollution: गंगा नदी को हम सब मां का दर्जा देते हैं और इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए देश भर में अरबों रुपये की परियोजनाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन जब प्रशासन की नाक के नीचे ही जीवनदायिनी गंगा की गोद में कचरा उड़ेला जाने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है. कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला बिहार के भागलपुर जिले से सामने आया है. यहां शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु से सीधे गंगा नदी में कचरा और धूल-मिट्टी फेंकी जा रही है. सोमवार को इस पूरी करतूत का एक वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जिस नदी को साफ करने के लिए दिन-रात दावों के ढोल पीटे जाते हैं, उसी नदी में सरकारी देखरेख के नाम पर प्रदूषण का जहर घोला जा रहा है.

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गंगा की स्वच्छता पर करारा प्रहार: वायरल वीडियो से खुली पोल

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु से गंगा नदी में धड़ल्ले से कचरा गिराए जाने का वीडियो जैसे ही लोगों के सामने आया, वैसे ही पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सेतु के ऊपर से भारी मात्रा में कचरा सीधे नदी के बहते पानी में गिराया जा रहा है. यह कचरा न केवल पानी को दूषित कर रहा है, बल्कि गंगा के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र और जलीय जीवों के जीवन को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है. सबसे दुखद बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद जिम्मेदार व्यवस्था पूरी तरह बेखबर बनी रही और पवित्र नदी को बेरोक-टोक प्रदूषित किया जाता रहा.

पुल की सफाई के नाम पर नदी में कचरा डंप करने का खेल

इस पूरी घटना के पीछे का कारण और संदर्भ बेहद चौंकाने वाला है. दरअसल, कुछ समय पहले विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था, जिसके बाद से आवागमन को सुचारू रखने के लिए वहां बेली ब्रिज का निर्माण कराया गया है. इस व्यस्त मार्ग पर गाड़ियों का दबाव अधिक होने के कारण समय-समय पर सेतु की सफाई का काम कराया जाता है. नियमानुसार पुल की सफाई के दौरान इकट्ठा होने वाली धूल, मिट्टी और ठोस कचरे को गाड़ियों में लादकर किसी निर्धारित डंपिंग यार्ड या कचरा प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचाया जाना चाहिए था. लेकिन प्रशासनिक ढिलाई और सफाई में लगे कर्मियों की मनमानी का आलम यह रहा कि मेहनत बचाने के चक्कर में पूरी धूल-मिट्टी और कचरे को सीधे पुल के नीचे बहती गंगा नदी में ही ढकेल दिया गया.

करोड़ों के सफाई अभियानों पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कई बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं. नमामि गंगे से लेकर स्थानीय जन-जागरूकता कार्यक्रमों तक, हर स्तर पर गंगा की स्वच्छता के दावे किए जाते हैं. लेकिन विक्रमशिला सेतु पर घटी इस घटना ने इन तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है. स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि जब तक इस तरह की प्रशासनिक नाफरमानी पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक कोई भी स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो सकता. लोगों का मानना है कि जब सरकारी एजेंसियां ही पुल की सफाई के नाम पर नदी को गंदा करेंगी, तो आम जनता को जागरूक करने के प्रयासों का कोई सार्थक असर नहीं पड़ेगा.

अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, जांच और मॉनिटरिंग का दिया आश्वासन

इस गंभीर मामले और लापरवाही के सामने आने के बाद जब प्रशासनिक महकमे से जवाब मांगा गया, तो लीपापोती की कोशिशें शुरू हो गईं. पुल निर्माण निगम के वरीय परियोजना अभियंता आकाशदीप ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए माना कि पुल की सफाई का कचरा किसी भी हाल में नदी में नहीं गिराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से कचरा नदी में फेंका जा रहा है, तो इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया की कड़ी मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके.

Vikramshila Setu Garbage Ganga Pollution: कड़े नियमों की सख्त दरकार और आगे की राह

विक्रमशिला सेतु से गंगा में कचरा गिराए जाने की यह घटना केवल एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि स्थायी निगरानी व्यवस्था के अभाव को दर्शाती है. अगर गंगा को सचमुच स्वच्छ रखना है, तो केवल कागजी हिदायतों से काम नहीं चलेगा. इसके लिए पुल पर नियमित रूप से सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी, कचरा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना और सफाई कार्य में लगी एजेंसियों की सख्त जवाबदेही तय करनी होगी. जब तक प्रशासनिक स्तर पर जीरो टॉलरेंस की नीति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक पावन गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने का सपना अधूरा ही रहेगा.

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