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करवा चौथ पर भद्रा का साया, व्रत पर नहीं पड़ेगा असर

Updated at : 19 Oct 2024 8:20 PM (IST)
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करवा चौथ पर भद्रा का साया, व्रत पर नहीं पड़ेगा असर

इस बार रविवार को होने वाले करवा चौथ पर भद्रा का साया है. हालांकि सुबह कुछ देर के लिए भद्रा काल है, जिससे व्रत पर भद्रा का असर नहीं पड़ेगा.

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इस बार रविवार को होने वाले करवा चौथ पर भद्रा का साया है. हालांकि सुबह कुछ देर के लिए भद्रा काल है, जिससे व्रत पर भद्रा का असर नहीं पड़ेगा. कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर 20 अक्तूबर रविवार को सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी. महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी और चांद का दीदार करने के बाद ही व्रत तोड़ेगी. बाजार में चलनी, शृंगार सामग्री, साड़ी, चूड़ियां आदि की खरीदारी को लेकर भीड़ उमड़ी, तो ब्यूटी पार्लर में फेशियल व मेहंदी स्टॉल पर हाथ में विभिन्न डिजाइन में मेहंदी रचवायी.

दिनभर का होता है निर्जला व्रत

पंडित आनंद मिश्रा ने बताया कि चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ दिया जाता है. पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत किया जाता है. महिलाएं दिन भर व्रत करती हैं. पंजाबी व सिंधी समाज में प्रमुखता से करवा चौथ व्रत किया जाता है. यह निर्जला व्रत है जिसे सुबह सूर्योदय से पहले शुरू किया जाता है और रात में चंद्रमा के साथ पति के मुख को देखकर व्रत का पारण किया जाता है.

ज्योतिषाचार्य पंडित आरके चौधरी ने बताया कि इस बार करवाचौथ के व्रत की शुरुआत भद्रा काल के साथ होगी. चतुर्थी तिथि की शुरुआत 20 अक्तूबर रविवार को सुबह 6.46 बजे होगी, वहीं चतुर्थी तिथि का अंत 21 अक्तूबर को अहले सुबह 4.16 बजे होगा. करवा चौथ के दिन भद्रा काल सुबह 06:25 से लेकर 06:46 मिनट तक रहेगा. इस दिन 21 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा. यानि चतुर्थी तिथि की शुरुआत और भद्रा काल समाप्त एक ही समय पर हो रहा है इसीलिए करवा चौथ के व्रत पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा.

करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत करती है. इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही पारण किया जाता है. करवा चौथ के दिन सरगी सूर्योदय से पहले खा ली जाती है. सरगी खाने का सही समय सुबह चार बजे से लेकर सुबह पांच बजे के बीच का होता है. इसीलिए इस काल के दौरान भी भद्रा का साया नहीं होगा.

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गुरुद्वारा परिसर में होगा भव्य आयाेजन

गुरुद्वारा परिसर में करवा चौथ पर भव्य आयोजन होगा. इस दौरान पंजाबी, सिंधी व सिख समाज की सुहागिन सामूहिक रूप से चांद का दीदार करेंगी. इस दौरान पूजा-अर्चना भी की जायेगी.

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फोटो नंबर : सिटी में

बॉक्स मैटर

शादी के बाद होगा पहला करवा चौथ

मारवाड़ी समाज के पटल बाबू रोड निवासी कैटरिंग कारोबारी प्रभात मिश्रा की शादी इसी साल वैष्णवी मिश्रा से हुई है. वैष्णवी मिश्रा ने कहा कि शरद पूर्णिमा की चौथी तिथि पर हरेक वर्ष यह व्रत किया जाता है. शादी का पहला करवा चौथ का खास महत्व होता है. वह सुबह चार बजे सरगी अर्थात कुछ मीठा व फल ग्रहण करेगी और दिन भर उपवास पर रहेंगे.

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पंजाबी समाज के खरमनचक निवासी खेल सामग्री कारोबारी अंशु धेरी एवं श्रेया धेरी की शादी भी इसी साल हुई है. श्रेया ने कहा कि परंपरा के अनुसार सुहागिनों को सुहाग की रक्षा के लिए यह व्रत करना है. उनके लिए सौभाग्य की बात है कि पहला करवा चौथ का व्रत है. पति की लंबी आयु के लिए चलनी के छेद से चांद और अपने पति को देखने का रिवाज है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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