चंपानगर के मस्कंद बरारीपुर में 4 अगस्त को होगी मां रक्षा काली महापूजा, 1001 दीपों से सजेगा मंदिर परिसर

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चंपानगर मस्कंद बरारीपुर स्थित मां रक्षा काली स्थान, जहां होगा भव्य आयोजन. | Prabhat Khabar Network

चंपानगर मस्कंद बरारीपुर स्थित मां रक्षा काली स्थान, जहां होगा भव्य आयोजन. | Prabhat Khabar Network

भागलपुर के चंपानगर में 4 अगस्त को मां रक्षा काली सिद्धपीठ में भव्य महापूजा का आयोजन होगा. 1001 दीपों से जगमगाएगा मंदिर परिसर, साथ ही महाआरती और महाभंडारे का भी आयोजन होगा.

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अंग महाजनपद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी भागलपुर के वार्ड संख्या 1 अंतर्गत चंपानगर स्थित मस्कंद बरारीपुर के प्राचीन 'मां रक्षा काली सिद्धपीठ' में मंगलवार, 4 अगस्त को भव्य 'मां रक्षा काली महापूजा' का आयोजन किया जाएगा. इस पावन अवसर पर 1001 दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव मनाया जाएगा. इसके साथ ही भव्य महाआरती, 56 भोग अर्पण एवं महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा.

युवा संघ मस्कंद बरारीपुर करा रहा है विशेष धार्मिक आयोजन

इस महान धार्मिक अनुष्ठान के सफल संचालन की जिम्मेदारी युवा संघ, मस्कंद बरारीपुर निभा रहा है.

संघ के सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि महापूजा के अवसर पर शाम 7:00 बजे से वैदिक एवं तांत्रिक विधि-विधान से मां रक्षा काली की विशेष पूजा शुरू होगी. इसके उपरांत 1001 दीपों के प्रज्वलन से संपूर्ण मंदिर प्रांगण आलोकित हो उठेगा. महाआरती और 56 भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा.

'मस्कंद' नाम का क्या है आध्यात्मिक महत्व?

हेमंत कश्यप ने क्षेत्र के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'मस्कंद' केवल एक भौगोलिक स्थान का नाम नहीं है.

  • पौराणिक जुड़ाव: साहित्यिक परंपराओं के अनुसार 'मस्कंद' शब्द का मूल 'स्कंद' यानी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय से जुड़ा है.
  • नामकरण: समय के साथ 'स्कंद' के आगे 'म' उपसर्ग जुड़ने से यह स्थान 'मस्कंद' कहलाया, जो आज भी इस क्षेत्र की प्राचीन सनातन परंपरा का प्रतीक है.

100 साल से अधिक पुराना है यह प्रसिद्ध सिद्धपीठ

पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी ने बताया कि मस्कंद स्थित यह मंदिर 100 वर्षों से भी अधिक पुराना सिद्धपीठ है.

  • मान्यता व फल: ऐसी लोक मान्यता है कि मां रक्षा काली के दर्शन और पूजन से गुप्त शत्रुओं का प्रभाव समाप्त होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भक्तों में साहस व आत्मबल का संचार होता है.
  • विभिन्न राज्यों से आते हैं श्रद्धालु: माता की कृपा और अटूट विश्वास के कारण भागलपुर व आसपास के जिलों के अलावा झारखंड के गोड्डा, दुमका और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं.

बंगाली टोला में अगहन अमावस्या को होती है विशेष पूजा

देवाशीष बनर्जी ने यह भी बताया कि चंपानगर बंगाली टोला के श्रीरामपुर घाट पर भी तांत्रिक विधि से मां रक्षा काली की पूजा की परंपरा रही है. इसकी शुरुआत प्रसिद्ध तांत्रिक घोलू बाबा ने अगहन माह की अमावस्या तिथि को की थी, जहां हर वर्ष तांत्रिक अपनी तंत्र साधना करते हैं.


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दीपक कुमार राव

लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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