मैथिल समुदाय की नवविवाहिताओं का अखंड सौभाग्य का पर्व 'मधुश्रावणी' शुरू, 15 अगस्त तक चलेगा पूजन

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साक्षी  ने  किया मधुश्रावणी का व्रत. | Prabhat Khabar Network

साक्षी  ने  किया मधुश्रावणी का व्रत. | Prabhat Khabar Network

भागलपुर में मैथिल समुदाय की नवविवाहिताओं ने सोमवार को ऐतिहासिक 'मधुश्रावणी व्रत' पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू किया. यह कठिन व्रत 15 अगस्त तक चलेगा, जिसमें महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सुहाग की कामना करेंगी.

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भागलपुर जिले में सोमवार को मैथिल समुदाय की नवविवाहिताओं का लोक आस्था और अखंड सौभाग्य से जुड़ा ऐतिहासिक पर्व 'मधुश्रावणी व्रत' पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया. सावन माह की पंचमी तिथि से शुरू हुआ यह कठिन व्रत 15 अगस्त तक चलेगा. परंपरा के अनुसार, नवविवाहिताओं ने हरी साड़ी और हरी चूड़ियां धारण कर व्रत का संकल्प लिया और विधि-विधान से प्रथम दिन का पूजन संपन्न किया.

नवगछिया की साक्षी ने विधि-विधान से शुरू किया व्रत

नवगछिया निवासी सुनील मिश्रा की पुत्री साक्षी कुमारी, जिनकी शादी इसी वर्ष जमशेदपुर में हुई है, ने सावन पंचमी पर अपने घर में मधुश्रावणी व्रत की शुरुआत की:

  • विशेष पूजन व्यवस्था: स्नान के बाद पूजन कक्ष में बैठी साक्षी का पूजन एक पंडितायन (महिला पुरोहित) ने पारंपरिक विधि-विधान से कराया.
  • पुरइन (कमल) के पत्ते पर आकृति: पूजन स्थल पर मैनी (कमल के पत्ते) पर अरिपन और विभिन्न धार्मिक आकृतियां बनाई गईं. इसके ऊपर भगवान महादेव, माता गौरी और नाग-नागिन की प्रतिमा स्थापित कर विशेष नैवेद्य अर्पित किया गया.
  • पारंपरिक लोकगीत: प्रातःकाल के पूजन में 'गोसांई गीत' एवं 'पावनी गीत' गाए गए, वहीं संध्या पूजा के समय 'कोहबर' और 'संझौती' के पारंपरिक गीत गूंजते रहे.

15 अगस्त को तृतीया तिथि पर होगा समापन

पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि यह व्रत नवविवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु, अखंड सुहाग और सुखद दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं. इस वर्ष व्रत का समापन 15 अगस्त को तृतीया तिथि के दिन होगा.

  • भाई का विशेष नेग: पूजन के दौरान एक नैवेद्य भाई के लिए अलग से लगाया जाता है. पूजा संपन्न होने के बाद भाई नवविवाहिता बहन की बांह पकड़कर उसे उठाता है, जिसके बाद बहन वह नैवेद्य अपने भाई को सौंपती है.

14 दिनों तक सुनी जाएंगी पौराणिक कथाएं

मधुश्रावणी पर्व के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग पौराणिक और लोक कथाएं सुनने का विधान है. आने वाले दिनों में व्रती महिलाओं को मैना पंचमी, विषहरी, बिहुला, मनसा, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, समुद्र मंथन तथा सती की कथाएं सुनाई जाएंगी.


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दीपक कुमार राव

लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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