मौलानाचक में सूफी हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद का 399वां उर्स-ए-पाक संपन्न, कव्वाली पर झूमे जायरीन

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मौलानाचक स्थित खानकाह शहबाजिया में कव्वाली का देर रात तक चला आयोजन  | Prabhat Khabar Network

मौलानाचक स्थित खानकाह शहबाजिया में कव्वाली का देर रात तक चला आयोजन | Prabhat Khabar Network

भागलपुर में हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह का 399वां उर्स-ए-पाक धूमधाम से संपन्न हुआ। कव्वाली और दुआओं के साथ अकीदतमंदों ने हाजिरी लगाई।

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भागलपुर के मौलानाचक स्थित सुप्रसिद्ध सूफी संत हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय 399वां उर्स-ए-पाक पूरी धार्मिक आस्था और अकीदत के साथ संपन्न हो गया. इस अवसर पर दरगाह शरीफ की जियारत के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं (जायरीन) की भारी भीड़ उमड़ी.

कुरानखानी, दुआ और महफिल-ए-शमा का आयोजन

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उर्स के अंतिम दिन खानकाह शरीफ में कई विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया:

  • कुरानखानी व दुआ: शाम छह बजे शाहजहानी मस्जिद में सामूहिक कुरानखानी और देश में अमन-चैन के लिए दुआ का आयोजन हुआ.
  • महफिल-ए-शमा: रात नौ बजे से सज्जादानशीन की गद्दी पर पारंपरिक महफिल-ए-शमा सजाई गई, जिसकी अध्यक्षता सज्जादानशीन सैयद शाह इंतेखाब आलम शहबाजी ने की.

यूपी के कव्वाल सरफराज रामपुरी के कलाम पर झूमे दर्शक

महफिल-ए-शमा में उत्तर प्रदेश से आए मशहूर कव्वाल सरफराज रामपुरी ने एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया:

"रख लाज मोरी लजपाल अली शाहबाज कलंदर, तुम हो लालो के लाल अली शाहबाज कलंदर..." "आयीं हैं आज फातेमा जहरा जमीन पर, कैसे रहे दिमाग जमी का जमीन पर..."

इन रूहानी पंक्तियों को सुनकर कार्यक्रम में मौजूद जायरीन देर रात तक भक्ति रस में झूमते रहे.

देश-विदेश से पहुंचे अकीदतमंद

तीन दिवसीय उर्स-ए-पाक के दौरान जियारत करने और फातिहा-नयाज दिलाने के लिए मुख्य रूप से कोलकाता, दिल्ली, झारखंड और बिहार के कोने-कोने से जायरीन पहुंचे.

शिक्षा के महान केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है खानकाह शहबाजिया

खानकाह स्थित मदरसा जामिया शहबाजिया के हेड शिक्षक मुफ्ती फारूक आलम अशरफी ने हजरत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया:

  • शिक्षा पर विशेष जोर: हजरत शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह ने जब भागलपुर की धरती पर कदम रखा, तो उन्होंने समाज में शिक्षा की रोशनी फैलाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया.
  • मदरसे की स्थापना: उन्होंने खानकाह परिसर में ही मदरसा कायम किया, जहां आज भी बड़ी संख्या में बच्चों को नि:शुल्क दीनी और दुनियावी शिक्षा प्रदान की जा रही है. उनके अनुयायी पूरे देश और दुनिया में फैले हुए हैं.


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आरफीन जुबैर

लेखक के बारे में

By आरफीन जुबैर

आरफीन जुबैर प्रिंट माध्यम में पिछले 16 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा और खेल में रुचि रखते हैं.

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