सावन की पहली सोमवारी पर मनाई गई नाग पंचमी, चंपानगर विषहरी स्थान में पारंपरिक रूप से हुई 'बेड़ा पंचमी' की पूजा

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चंपानगर विषहरी स्थान में बेड़ा पंचमी पर पूजा करते  श्रद्धालु. | Prabhat Khabar Network

चंपानगर विषहरी स्थान में बेड़ा पंचमी पर पूजा करते  श्रद्धालु. | Prabhat Khabar Network

भागलपुर में नाग पंचमी का पर्व सावन की पहली सोमवारी के साथ मनाया गया. चंपानगर के विषहरी स्थान में 'बेड़ा पंचमी' का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें महासती नेतुला धोबिन की पूजा की गई. श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की.

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श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर सोमवार को भागलपुर जिले भर में नाग पंचमी का पर्व अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. सावन की पहली सोमवारी और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग के बीच ऐतिहासिक अंग महाजनपद की प्राचीन राजधानी चंपानगरी स्थित विषहरी स्थान में पारंपरिक 'बेड़ा पंचमी' का आयोजन हुआ. इस अवसर पर शिवालयों और विषहरी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.

शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु, नाग देवता को चढ़ाया दूध और लावा

सावन की पहली सोमवारी और नाग पंचमी एक ही दिन होने के कारण जिले के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली:

  • प्रमुख मंदिर: बूढ़ानाथ मंदिर, शिव शक्ति मंदिर, भूतनाथ मंदिर और कूपेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों ने कतारबद्ध होकर पूजा-अर्चना की.
  • पारंपरिक पूजन: चूंकि नागराज भगवान शिव के आभूषण के रूप में विराजमान हैं, इसलिए श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध और लावा अर्पित कर परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

चंपानगर में विशेष 'बेड़ा पंचमी': महासती नेतुला धोबिन की हुई विशेष पूजा

देश के अधिकांश हिस्सों में कृष्ण पक्ष की नाग पंचमी मनाई जाती है, लेकिन भागलपुर के चंपानगर में यह दिन सांस्कृतिक और लोक परंपरा के तहत 'बेड़ा पंचमी' के रूप में मनाया जाता है:

  • नेतुला धोबिन की साधना को नमन: मुख्य मनसा देवी मंदिर में प्राचीन रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ बेड़ा पंचमी का पूजन संपन्न हुआ. इस दिन बिहुला-विषहरी लोकगाथा की मुख्य पात्र महासती साधिका नेतुला धोबिन की विशेष पूजा की गई.
  • वरदान की पौराणिक कथा: सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत कश्यप ने बताया कि नेतुला धोबिन ही सती बिहुला को स्वर्ग लोक तक ले जाने का माध्यम बनी थीं. उनकी भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर देवी मनसा ने उन्हें स्वयं के साथ पूजित होने का वरदान दिया था.

डलिया चढ़ाने पहुंचे अकीदतमंद, ओझा-गुनियों ने सिद्ध किए मंत्र

चंपानगर विषहरी स्थान के पुजारी संतोष झा ने बताया कि बेड़ा पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा मां मनसा और नेतुला धोबिन को डलिया चढ़ाया गया:

  • रजक समाज और सर्वसमाज की सहभागिता: लोकमान्यता के अनुसार, इस दिन मुख्य रूप से धोबी (रजक) समाज के लोग बड़ी संख्या में डलिया चढ़ाते हैं. अब अन्य समाज के लोग भी सामूहिक रूप से उपस्थित होकर पूजन कर रहे हैं.
  • तंत्र-मंत्र साधना: बेड़ा पंचमी के दिन विषहरी स्थानों पर ओझा और गुनी अपने पारंपरिक मंत्रों को सिद्ध करने के लिए अनुष्ठान करते नजर आए.


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दीपक कुमार राव

लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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