bhagalpur news. अंगिका के उत्थान के लिए केंद्र सरकार से पहल करने की जरूरत

Updated at : 06 Apr 2026 1:01 AM (IST)
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bhagalpur news. अंगिका के उत्थान के लिए केंद्र सरकार से पहल करने की जरूरत

कला केंद्र में अंगिका भाषा के हक को लेकर स्थानीय संगठनों के लोगों एवं राजनीतिक पार्टियों के जनप्रतिनिधियों की बैठक रामशरण की अध्यक्षता में हुई

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कला केंद्र में अंगिका भाषा के हक को लेकर स्थानीय संगठनों के लोगों एवं राजनीतिक पार्टियों के जनप्रतिनिधियों की बैठक रामशरण की अध्यक्षता में हुई. बैठक में 50 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में अंग महाजनपद सबसे पहला महाजनपद था, जिसकी प्राचीन भाषा भी अंगिका ही थी फिर भी इस भाषा की उपेक्षा और सरकार का कोई ध्यान नहीं देना समझ से परे है. कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा ने कहा कि अंग क्षेत्र की अंगिका भाषा की जनगणना में स्वतंत्र कोड प्रदान कर इस भाषा के उत्थान के लिए हमें केंद्र सरकार से पहल करने की जरूरत है. भाजपा अध्यक्ष संतोष कुमार साह ने कहा अगर अंगिका भाषा के लोग जनगणना में कम आके गए हैं, तो इन त्रुटियों में सुधार कर आने वाले जनगणना में नई सूची में भागलपुर के साथ-साथ दूसरे जिले के अंगिका भाषी लोगों को भी जोड़ा जायेगा. कहलगांव नगर परिषद के अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने कहा कि हम भी अंगिका भाषा के लिए चिंतित हैं. सबसे पहले हमें अपने अपने घरों में बच्चों के साथ अंगिका भाषा मैं ही बातचीत करने की जरूरत है. अपने सगे संबंधियां से मिलने पर या मोबाइल फोन पर भी हमें अपनी अंगिका भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए, ताकि आम दिनों में भी हम अंगिका के लिए समर्पित रह सकें. सुधीर मंडल ने कहा कि हमें इस अंगिका भाषा को हक दिलाने के लिए दिल्ली में भी अगर धरना देना होगा, तो हम अधिक से अधिक लोगों को लेकर जंतर मंतर पर बैठेंगे. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अंगिका भाषा को जनगणना में स्वतंत्र कोड प्रदान करने की मांग करेंगे. उनका कहना है कि बिहार और झारखंड के लगभग एक दर्जन जिलों में करोड़ों लोग अंगिका बोलते हैं, लेकिन इसे वह संवैधानिक और प्रशासनिक मान्यता नहीं मिली है जिसकी यह हकदार हैं. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दी जानी चाहिए, लेकिन अंगिका को जनगणना और प्रशासनिक मान्यता से वंचित रखने से अंगिका भाषी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा के अवसर से वंचित होना पड़ेगा. मौके पर किशन कालजयी, डॉ मनोज मनोज मिता, कवि राजकुमार,आलोक यादव, कवि मनजीत सिंह कीनवार, शशि भूषण सिंह, मृदुल सिंह, सत्यनारायण मंडल, शशि शंकर, कवि गौरव कुमार, सौरव, मिथिलेश कुमार आदि उपस्थित थे.

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