bhagalpur news. शिवशक्ति की परंपरा का उत्सव, तिलकोत्सव में शामिल होने सुलतानगंज पहुंचे मिथिलावासी
Published by : ATUL KUMAR Updated At : 17 Jan 2026 12:53 AM
अजगैबीनगरी सुलतानगंज इन दिनों शिवभक्ति के रंग में रंग चुकी है. द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ के तिलकोत्सव को लेकर मिथिलांचल से कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ा है
शुभंकर, सुलतानगंज. अजगैबीनगरी सुलतानगंज इन दिनों शिवभक्ति के रंग में रंग चुकी है. द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ के तिलकोत्सव को लेकर मिथिलांचल से कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ा है. अब तक एक लाख से अधिक कांवरिया पहुंच चुके है, जो तीन से चार किमी के क्षेत्र में जगह-जगह ठहरे हैं. रविवार को मौनी अमावस्या पर हजारों कांवरिये उत्तरवाहिनी गंगा का जल भरकर पैदल बाबाधाम देवघर की ओर प्रस्थान करेंगे. वसंत पंचमी के दिन होने वाले बाबा वैद्यनाथ के तिलकोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है. माघ मास में मिथिलांचल के गांव-गांव से शिवभक्त अपने-अपने जत्थों में सुलतानगंज पहुंचते हैं. कई कांवरिया अपने घरों से ही पैदल यात्रा प्रारंभ करते हैं और सुलतानगंज पहुंचकर फिर से कठिन पैदल यात्रा कर देवघर तक बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं.
शादी से पूर्व तिलक की जीवंत परंपरा
प्रभात खबर से बातचीत में कांवरियों ने बताया कि बाबा वैद्यनाथ के विवाह से पूर्व तिलक की परंपरा सदियों पुरानी है. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती मिथिलांचल की बेटी थीं, इसलिए बाबा का तिलक भी मिथिलावासियों द्वारा ही किया जाता है. परंपरा के तहत अजगैबीनगरी की पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालु बाबा के तिलकोत्सव के लिए देवघर प्रस्थान करते हैं. 23 जनवरी को वसंत पंचमी सरस्वती पूजा के दिन विधि-विधान से बाबा का तिलक होगा.
हर घर से निकलता है शिवभक्त
इसके पूर्व मौनी आमावस्या में गंगा जल लेकर कांवरिया बाबाधाम जाने की तैयारी में है. मिथिलांचल की परंपरा में शिव और शक्ति का विशेष स्थान है. समस्तीपुर के श्रद्धालु कौशल मिश्र बताते हैं कि माघ मास में सुलतानगंज से गंगा जल लेकर देवघर जाना आस्था का पर्व है. मान्यता है कि भगवान राम ने भी माघ अमावस्या को उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर बाबा पर जलार्पण किया था. इसी परंपरा के निर्वाह में आज भी मिथिलांचल के हर घर से कम से कम एक व्यक्ति कांवरिया बनकर देवघर की यात्रा करता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माघ मास में बाबा पर जल अर्पण करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. रामधुनी, कीर्तन और बाजारों में रौनकमिथिलांचल से दर्जनों रामधुनी और कीर्तन मंडलियां सुलतानगंज पहुंच चुकी हैं. अखंड कीर्तन के साथ कांवरिये देवघर तक जाएंगे. श्रद्धालु स्वयं अपने भोजन व व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाते हैं. कांवरियों की बढ़ती संख्या से अस्थायी दुकानों, पूजन सामग्री बाजारों में रौनक लौट आई है. चतुर्दशी, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी के संयोग से इस बार लाखों कांवरियों के पहुंचने की संभावना है. भीड़ को देखते हुए अजगैबीनाथ मंदिर प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए हैं. शिवभक्ति, परंपरा और आस्था का यह अद्भुत संगम सुलतानगंज में देखने को माघ मास में मिल रहा है.
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