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bhagalpur news. टिकट नहीं लियो तो रेलवे किसी बात के लिए जिम्मेवार नहीं

प्रभात खबर कार्यालय में लीगल काउंसलिंग.

प्रभात खबर कार्यालय में आयोजित लीगल काउंसलिंग में अधिवक्ता अशोक कुमार बनर्जी ने पाठकों के सवालों के दिए जवाब

प्रभात खबर कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग में रेलवे मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता अशोक कुमार बनर्जी ने कहा कि रेलवे आरामदायक सफर का अवसर प्रदान करता है. इसलिए लोगों को सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूकता के साथ यात्रा करनी चाहिए. अधिवक्ता ने कहा कि अगर कोई विधिवत टिकट ले कर यात्रा कर रहा है और किसी तरह के हादसे का शिकार हो जाए तो निश्चित रूप से वह यात्री रेलवे के समक्ष मुआवजा क्लेम कर सकता है. लेकिन अगर टिकट नहीं लिया है तो रेलवे किसी प्रकार की जिम्मेवारी नहीं लेगा. अधिवक्ता ने कहा कि वर्तमान में भी रेलवे में यात्री सुविधाओं के मद्देनजर कई तरह के सुधार किये जाने की आवश्यकता है, इसमें सबसे प्रमुख समस्या ट्रेनों की कमी है. ट्रेनों की कमी के कारण अत्यधिक भीड़ होती है, कई बार भीड़ के कारण यात्री यात्रा भी नहीं कर पाते. यह यात्रियों के साथ न्याय नहीं है. यात्रियों की भीड़ को देखते हुए ट्रेनों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए.अधिवक्ता ने बड़ी संख्या में पाठकों को रेलवे से संबंधित प्रश्नों का सहज शब्दों में उत्तर दिया. प्रस्तुत है प्रमुख प्रश्न और उसके उत्तर…प्रश्न – रेलवे की यात्रा के दौरान यदि यात्री का सामान चोरी हो जाए तो क्या मुआवजा मिलता है और इसके लिए कहां व कैसे शिकायत करनी चाहिए ?

राजेश कुमार, भागलपुर.

उत्तर – मुआवजे का प्रावधान नहीं है. आप संदर्भित जीआरपी थाने में आवेदन दे कर शिकायत कर सकते हैं

प्रश्न – ट्रेन लेट होने या रद्द होने की स्थिति में टिकट रिफंड के क्या नियम हैं और पैसा कितने दिनों में वापस मिलता है?

सीमा देवी, सबौर

उत्तर – ट्रेन विलंब होने की स्थिति में आप काउंटर पर रिफंड ले सकते हैं, कुल राशि में 30 फीसदी की कटौती होगी, जबकि ट्रेन रद्द होने की स्थिति में आप काउंटर पर टिकट वापस कर पूरा पैसा प्राप्त कर सकते हैं.

प्रश्न – रेलवे में नौकरी से जुड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के खिलाफ कर्मचारी किन कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है ?अमित सिंह, कहलगांव

उत्तर – इसके लिए ट्रिब्यूनल बना हुआ है आप वाद दायर कर सकते हैं. प्रश्न – रेलवे ट्रैक या स्टेशन परिसर में दुर्घटना होने पर पीड़ित या उसके परिजन को मुआवजा कैसे और कहां से मिलता है?

पंकज यादव, नाथनगर

उत्तर – पीड़ित या उनके परिवार एफआईआर कॉपी, इंजरी या पोस्टमार्टम रिर्पोट, यात्रा का टिकट और पहचान पत्र के साथ क्लेम कर सकते हैं.

प्रश्न – रेलवे के छोटे ठेके में काम करने के बाद अगर बिल पास नहीं हो रहा हो या भुगतान महीनों से अटका हो, तो ठेकेदार को अपनी राशि पाने के लिए कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए?

नसीम अहमद, जमालपुर, मुंगेर.

उत्तर – आप रेल के वरीय पदाधिकारियों से शिकायत करें, अगर आपका पक्ष सही हुआ तो निश्चित रूप से आपका बिल पास होगा. अगर पदाधिकारी नहीं सुनते हैं तो आप न्यायालय में वाद दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं.

प्रश्न – रेलवे स्टेशन या ट्रेन में यात्रियों से जबरन वसूली, दलाल या फर्जी कुली सक्रिय हों तो आम यात्री तत्काल किस अधिकारी से और किस माध्यम से शिकायत करें ताकि तुरंत कार्रवाई हो सके.

रमेश कुमार, तिलकामांझी, भागलपुर

उत्तर – जीआरपी, आरपीएफ से इस तरह की शिकायत करें, त्वरित कार्रवाई होगी.

प्रश्न – रेलवे में नौकरी या ठेके से जुड़े काम के नाम पर अगर कोई व्यक्ति रिश्वत या पैसे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी रूप से सबसे प्रभावी कदम क्या है और सबूत कैसे सुरक्षित रखें.

पूजा देवी, नाथनगर, भागलपुर.

उत्तर – रेल पुलिस से लिखित शिकायत करें और साक्ष्य भी दें, निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.

प्रश्न – नवगछिया के एक व्यक्ति की मौत रेल पर चढ़ने के क्रम किसी दूसरे राज्य में हो गयी है. क्या उक्त मामले में मुआवजा क्लेम की सुनवाई स्थानीय स्तर पर हो सकती है ?विलास राम, नवगछिया.

उत्तर – जहां घटना घटी है, सुनवाई तो वहीं के संबंधित न्यायालय में होगी, लेकिन अगर संबंधित न्यायालय में प्रे किया जाय तो हो सकता है कि आपके केस को स्थानांतरित कर दिया जाय.

25 से 30 सालों में हुआ बहुत बदलाव

अधिवक्ता अशोक कुमार बनर्जी ने कहा कि रेलवे के वर्तमान स्थिति को पिछले 25 से 30 सालों से तुलना करें तो व्यापक बदलाव देखने को मिले. इन दिनों यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया जा रहा है. बीते वर्षों में ट्रैक और सिग्नल प्रणाली के आधुनिकीकरण से दुर्घटनाओं में कमी आई है. आधुनिक सुरक्षा तकनीकें ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद कर रही हैं. स्टेशनों और ट्रेनों में आरपीएफ और जीआरपी की तैनाती बढ़ाई गई है, वहीं सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है. महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन, आरक्षित कोच और महिला कर्मियों की तैनाती की गयी है. आपात स्थिति से निपटने के लिए कोचों में अलार्म चेन और अग्निशमन उपकरण उपलब्ध हैं. जागरूकता अभियानों से यात्रियों को भी सतर्क किया जा रहा है.

प्रस्तुति – ऋषव मिश्रा कृष्णा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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