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Bhagalpur news गुरु वह है जो आपको आपसे मिलवाता है : धनंजय वैष्णव जी

Updated at : 05 Sep 2025 12:15 AM (IST)
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Bhagalpur news गुरु वह है जो आपको आपसे मिलवाता है : धनंजय वैष्णव जी

गुरु वह है जो आपको आपसे मिलवाता है. आपसे आपका परिचय कराता है. उक्त बातें रामजानीपुर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास धनंजय वैष्णव जी महाराज ने कहीं.

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गुरु वह है जो आपको आपसे मिलवाता है. आपसे आपका परिचय कराता है. उक्त बातें रामजानीपुर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास धनंजय वैष्णव जी महाराज ने कहीं. उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, भगवान कृष्ण का अवतार होता है, और किसी न किसी रूप में संतों की रक्षा करने और असुर, अधम अभिमानी का वह संहार करते हैं. एक प्रसंग में सूर्यवंश की चर्चा में कहा कि भगवान नारायण के पुत्र ब्रह्मा उनके पुत्र मारीचि थे. मारीचि के पुत्र कश्यप. इसी वंश में आगे चल कर सूर्य भगवान के नाम से सूर्यवंश चला. इसी वंश में राजा हरिश्चंद्र, रोहित, रोहिदास, असमंजस, अंशुमान, भागीरथ, दिलीप, हरिश्चंद्र, रघु व रघु के पुत्र दिलीप थे. इसी वंश में एक और राजा हुए जिनका नाम अज था. अज के पुत्र महाराज दशरथ. महाराज दशरथ के घर में ही भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न धरती का पाप, अधर्म अत्याचार को मिटाने आये और राक्षसों, पापियों को अधर्मियों का नाश कर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर पुनः अपने धाम चले गये. 15 अध्याय में सूर्यवंश की चर्चा होने के बाद भागवत महापुराण के 9वें स्कंध में चंद्र वंश की चर्चा है, जिसमें भगवान कृष्ण के पूर्वजों की चर्चा है. यदु से यदुवंशियों का प्रदुर्भाव हुआ. यदु पांच भाई थे, इसी वंश में आगे चल कर एक राजा हुए देवमीड़. राजा की दो पत्नियां थी, पहली पत्नी से सूर्य सेन हुए. उनका बेटा वासुदेव और दूसरी पत्नी से अर्जन्य और पर्जन्य हुए, जिनमें नंद घनानंद आदि पांच भाई हुए. नंद वासुदेव अपने परिवार में चचेरे भाई थे. वासुदेव के यहां भगवान कृष्ण और बलराम का मथुरा में जन्म हुआ और गोकुल में जन्मोत्सव मनाया गया. कृष्ण के बहन के रूप में नंद यशोदा के घर में साक्षात योग माया प्रकट हुई, जो कंस को बतायी कि तुमको मारने वाला देवकी से आठवीं संतान वृंदावन और ब्रज में अवतार ले चुका है. योगमाया आकाशवाणी करके विंध्याचल पर्वत पर स्थिर हो गयी. आज भी यदुवंशियों की कुलदेवी के रूप में उनका पूजन विंध्याचल पर्वत पर दुर्गा माता के रूप में किया जाता है.

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