गोपालपुर में देर रात झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना, लेकिन जलजमाव ने बढ़ाई आफत; सड़कों पर बहा तालाब जैसा पानी
सैदपुर में वर्षा के दौरान सड़क पर जमा पानी | Prabhat Khabar Network
Heavy Rain Waterlogging: भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड और आसपास के इलाकों में देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने जहाँ एक ओर चिलचिलाती गर्मी से राहत दी है और मौसम को खुशनुमा बना दिया है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है. लगातार बारिश के चलते क्षेत्र के कई गांवों में भीषण जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है.
Heavy Rain Waterlogging: झमाझम बारिश के कारण लोग रात से ही अपने-अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. सड़कों पर समुचित जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की व्यवस्था न होने से पानी लग गया है, जिससे पैदल राहगीरों से लेकर वाहन चालकों तक को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. केवल इंसान ही नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे बंधे मवेशी और पशुपालक भी इस आसमानी आफत से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
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मवेशियों के चारे और दूध उत्पादन पर पड़ा असर
लगातार हो रही तेज बारिश के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पशुपालकों और किसानों को उठानी पड़ रही है. चारे की किल्लत और जलजमाव के बीच खुले में बंधे माल-मवेशी रातभर भीगते रहे.
"रात से ही लगातार हो रही वर्षा में माल-मवेशी बाहर खड़े रहने को विवश हैं. ठंड और नमी के कारण मवेशियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है और गायों के दूध उत्पादन में भी अचानक कमी आ गई है. अगर बारिश ऐसे ही जारी रही तो पशुओं के लिए सूखा चारा जुटाना मुश्किल हो जाएगा." — साजो दास, स्थानीय पशुपालक
सड़कें बनीं तालाब, पैदल चलने वालों पर उड़ रहा गंदा पानी
बारिश के बाद गोपालपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले अधिकांश प्रमुख गांवों की सूरत बिगड़ गई है. विशेष रूप से निम्नलिखित इलाके जलजमाव की चपेट में हैं:
- सिंघिया मकंदपुर और गोसाईंगांव.
- अभिया और सुकटिया बाजार का मुख्य मार्ग.
- पचगछिया और सैदपुर गांव की अंदरूनी सड़कें.
इन गांवों की मुख्य सड़कें पूरी तरह जलमग्न होकर तालाब का रूप ले चुकी हैं. जब इन जलजमाव वाली सड़कों से तेज रफ्तार गाड़ियां गुजरती हैं, तो गंदा पानी किनारे से पैदल चल रहे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों पर पड़ता है, जिससे आए दिन विवाद की स्थिति भी बन रही है.
'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हुए लोहिया स्वच्छता अभियान के सोख्ते
ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल मानसून के दस्तक देते ही पूरे गोपालपुर क्षेत्र में जलजमाव की यही नारकीय स्थिति उत्पन्न हो जाती है, लेकिन स्थानीय पंचायत और प्रखंड प्रशासन द्वारा इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता.
ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार द्वारा 'लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान' के तहत सड़कों के किनारे जल निकासी के लिए सोख्ता (Soak Pit) का निर्माण तो कराया गया था, लेकिन भारी मानसूनी बारिश के आगे ये सोख्ते पूरी तरह नाकाफी और फेल साबित हो रहे हैं. यह व्यवस्था अब 'ऊंट के मुंह में जीरा' वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है.
प्रशासन से नाला निर्माण की गुहार
त्रस्त ग्रामीणों ने भागलपुर जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि पारंपरिक सोख्तों के भरोसे रहने के बजाय गांवों में जल निकासी के लिए पक्के और बड़े नालों का निर्माण कराया जाए. यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह जलजमाव महामारी और संक्रामक बीमारियों का रूप ले सकता है.
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