Bhagalpur news घटोरा एक नये रामसर साइट के रूप में स्थापित होगा

घटोरा आर्द्रभूमि जल्द ही बिहार की एक नयी रामसर साइट के रूप में स्थापित होगी.
घटोरा आर्द्रभूमि जल्द ही बिहार की एक नयी रामसर साइट के रूप में स्थापित होगी. जिले के सोनवर्षा, बिहपुर प्रखंड स्थित घटोरा आर्द्रभूमि एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. बीते तीन–चार वर्षों से यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि ने इसे पर्यावरणविदों और वन विभाग के लिए विशेष रुचि का विषय बना दिया है. शनिवार को बिहार वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की एक टीम ने घटोरा आर्द्रभूमि का दौरा कर इसे रामसर साइट घोषित करने की संभावनाओं का सर्वेक्षण किया. टीम में बिहार वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक एस चंद्रशेखर, वन संरक्षक एस सुधाकर, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक सुब्रमणियम कुमार स्वामी तथा भागलपुर वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी आशुतोष कुमार शामिल थे. अधिकारियों ने भौगोलिक, जैविक और पारिस्थितिक पहलुओं का अवलोकन किया. निरीक्षण में अधिकारियों ने घटोरा आर्द्रभूमि में मौजूद जल क्षेत्र, आसपास की वनस्पतियों, प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की प्रजातियों, जल की उपलब्धता और संरक्षण की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन किया. सर्वेक्षण के उपरांत अधिकारियों ने संकेत दिये कि घटोरा आर्द्रभूमि रामसर साइट के लिए निर्धारित लगभग सभी मानकों पर खरा है. उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रियाओं और तकनीकी जांच पूरी करने के बाद इसे शीघ्र ही रामसर साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस पहल की जायेगी. मौके पर बिहार जलपक्षी गणना के समन्वयक दीपक कुमार झुन्नू ने कहा कि घटोरा आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध जैव-विविधता, विशिष्ट पारिस्थितिक महत्व और अनोखी प्राकृतिक संरचना से अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान पाने की पूरी क्षमता रखती है. यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों, विभिन्न जलीय जीवों और स्थानीय वनस्पतियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित हुआ है. हर वर्ष यहां काफी संख्या में विदेशी पक्षियों का आगमन होता है, जो इसकी पारिस्थितिक सेहत का प्रमाण है. घटोरा आर्द्रभूमि केवल पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि जल-संचयन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यदि इसे रामसर साइट का दर्जा मिलता है, तो न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बढ़ेगी, बल्कि संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी. बाक्स:::
क्या है रामसर साइटरामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को कहा जाता है. इसे पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से रामसर कन्वेंशन के तहत मान्यता दी जाती है. यह कन्वेंशन वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुआ था, जिसमें भारत 1982 में शामिल हुआ. रामसर साइट का उद्देश्य झीलों, तालाबों, नदियों, दलदली क्षेत्रों और जलाशयों जैसी आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना है. ऐसी आर्द्रभूमियां प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों और वनस्पतियों का प्रमुख आश्रय होता है. रामसर साइट घोषित होने से जल संचयन, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु संतुलन और जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिलता है. इससे अंतरराष्ट्रीय पहचान, सरकारी संरक्षण, इको-टूरिज्म व आजीविका के अवसर विकसित होते हैं. भारत में रामसर साइट्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. अक्तूबर–दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 96 रामसर साइट्स हैं. बिहार में अब तक छह रामसर साइट्स रामसर सूची में शामिल किये जा चुके हैं. काबरताल/काबर झील, नगी पक्षी अभ्यारण्य और नकटी पक्षी अभ्यारण्य , गोगाबील झील जैसे आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा मिला है, जिससे बिहार में रामसर साइटों की संख्या बढ़ी है और राज्य का पर्यावरण संरक्षण में योगदान मजबूत हुआ है.
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