पितृ तर्पण शुरू होने में बचे चार दिन और घाटों पर फैली है अव्यवस्था

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 13 Sep 2024 9:39 PM

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इस वर्ष 17 सितंबर मंगलवार को भादो पूर्णिमा का श्राद्ध होगा. उसी दिन अगस्त दान व ऋषि तर्पण होगा. बुधवार 18 सितंबर को आश्विन कृष्ण प्रतिपदा प्रारंभ हो रहा है.

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– भादो शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर 17 सितंबर के शुरू होगा पितृ तर्पण और आश्विन मास की अमावस्या पर दो अक्तूबर को महालया की होगी समाप्ति

फोटो नंबर : सिटी

वरीय संवाददाता, भागलपुर

इस वर्ष 17 सितंबर मंगलवार को भादो पूर्णिमा का श्राद्ध होगा. उसी दिन अगस्त दान व ऋषि तर्पण होगा. बुधवार 18 सितंबर को आश्विन कृष्ण प्रतिपदा प्रारंभ हो रहा है. उसी दिन से पितृ तर्पण शुरू हो जायेगा. बुधवार से लगातार 16 दिनों तक पितृ तर्पण होगा. अभी से पितृ तर्पण शुरू होने में चार दिन बचे हैं और भागलपुर के महत्वपूर्ण घाटों बरारी सीढ़ी घाट व बरारी पुल घाट पर अव्यवस्था फैली हुई है.

पितृ पक्ष शुरू होते मंगलवार को विभिन्न गंगा तटों बरारी सीढ़ी घाट, एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट, पुल घाट आदि पर पितरों के लिए परिजनों द्वारा तर्पण किया जायेगा. यह कार्यक्रम लगातार 16 दिनों तक चलेगा. भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूर्वी बिहार, झारखंड के निकटवर्ती जिलों के लाेग गंगा घाट पर पहुंचकर पितृ तर्पण करते हैं. फिर भी कहीं शौचालय की सुविधा नहीं है, तो कहीं कपड़ा बदलने की पर्याप्त सुविधा नहीं दी गयी है.

बरारी सीढ़ी घाट पर शौचालय व महिलाओं को कपड़े बदलने की सुविधा दी गयी है, लेकिन स्मार्ट सिटी के तहत बनाये गये बरारी पुल घाट पर शौचालय की सुविधा नहीं दी गयी है. केवल एक कपड़ा बदलने के लिए टीना का घर बनाया गया है. स्मार्ट सिटी घाट को तैयार किये हुए एक साल भी नहीं हुआ और जगह-जगह कचरा व पान-गुटखा का पिक फेंका गया है. यहां सफाई की कोई सुविधा नहीं है, जबकि इससे पहले पुराने बरारी पुल घाट पर नगर निगम की ओर से सफाईकर्मी की व्यवस्था की गयी थी. एसएम कॉलेज घाट पर न कपड़ा बदलने की सुविधा है ओर न ही शौचालय की सुविधा है.

17 को भादो पूर्णिमा पर गंगा तटों पर उमड़ेगी भीड़

भादो पूर्णिमा 16 सितंबर को है. उसी दिन अगस्त दान व ऋषि तर्पण होगा. भादो पूर्णिमा को लेकर मंगलवार को सभी गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी. पितृ पक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक चलता है. इन 15-16 दिनों में लोग अपने पितरों को तिल और जल देकर पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है.

जगह-जगह होगी भगवान सत्यनारायण की पूजा

भादो पूर्णिमा पर जिले के विभिन्न स्थानों पर भगवान सत्यनारायण की पूजा होती है. शहर के लहरी टोला, घंटाघर चौक, नया बाजार आदि स्थानों पर भी भगवान सत्यनारायण की पूजा होती है. रामदास गुप्ता पथ लहेरी टोला में भगवान सत्यनारायण की पूजा होगी.

श्राद्ध करने से पितृगण साल भर रहते हैं प्रसन्न

ज्योतिषचार्य पंडित आरके चौधरी ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं. यद्यपि प्रत्येक अमावस्या पितरों की पुण्यतिथि है. तथापि आश्विन माह की अमावस्या पितरों के लिए परम फलदायी है.

पितृ पक्ष में श्राद्ध की महिमा

पंडित सौरभ मिश्रा ने बातया कि धर्मशास्त्र में कहा गया है कि पितरों को पिंडदान करने वाला मनुष्य दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी, पशु, सुख-साधन एवं धन-धान्य की प्राप्ति करता है. इतना ही नहीं पितरों की कृपा से ही उसे सब प्रकार की समृद्धि सौभाग्य, राज्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है. आश्विन मास के पितृ पक्ष में पितरों को आशा लगी रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें पिंडदान तथा तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे. यही आशा लेकर वे पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं. अतएव प्रत्येक हिंदू मानव का धर्म है कि वह पितृ पक्ष में अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध एवं तर्पण अवश्य करे तथा अपने शक्ति के अनुसार फल-फूल जो भी संभव हो, पितरों के निमित्त अर्पित करे.

पितृ पक्ष श्राद्धों के लिए 15 तिथियों का एक समूह

पंडित अंजनी शर्मा ने बताया कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृ पक्ष के नाम से विख्यात है. इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी पुण्यतिथि पर श्राद्ध करते हैं. पितरों का ऋण श्राद्धों द्वारा चुकाया जाता है. पितृ पक्ष श्राद्धों के लिए निश्चित 15 तिथियों का एक समूह है. वर्ष के किसी भी माह व तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृ पक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है. भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को श्राद्ध करने का विधान है. इसी दिन से महालया का आरंभ भी माना जाता है.

श्राद्धकर्ता के लिए वर्जित

जो श्राद्ध करने के अधिकारी हैं, उन्हें पूरे पितृ पक्ष के दौरान क्षौरकर्म नहीं करना चाहिए. पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए. प्रतिदिन स्नान के बाद तर्पण करना चाहिए. तेल, उबटन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. दातून करना, पान खाना, तेल लगाना, मांसाहारी भोजन करना, स्त्री प्रसंग और दूसरों का अन्न ये श्राद्धकर्ता के लिए वर्जित हैं. मनुष्य जिस अन्न को स्वयं भोजन करता है, उसी अन्न से पितर और देवता भी तृप्त होते हैं.

श्राद्ध की सभी प्रमुख तिथियां

प्रोषठपदी पूर्णिमा का श्राद्ध : 17 सितंबर मंगलवार

प्रतिपदा का श्राद्ध : 18 सितंबर बुधवार

द्वितीया का श्राद्ध : 19 सितंबर गुरुवार

तृतीतया का श्राद्ध : 20 सितंबर शु्क्रवार

चतुर्थी का श्राद्ध : 21 सितंबर शनिवार

पंचमी का श्राद्ध : 22 सितंबर रविवार

षष्ठी का श्राद्ध : 23 सितंबर सोमवार

सप्तमी का श्राद्ध : 24 सितंबर मंगलवार

अष्टमी का श्राद्ध : 25 सितंबर बुधवार

नवमी का श्राद्ध : 26 सितंबर गुरुवार

दशमी का श्राद्ध : 27 सितंबर शुक्रवार

एकादशी का श्राद्ध : 28 सितंबर शनिवार

द्वादशी का श्राद्ध : 29 सितंबर रविवार

त्रयोदशी का श्राद्ध : 30 सितंबर सोमवार

चतुर्दशी का श्राद्ध : एक अक्तूबर मंगलवार

सर्व पितृ अमावस्या व महालया श्राद्ध : दो अक्तूबर बुधवार

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