bhagalpur news. 12 वार्डों में आ रहा बदबू वाला हरा पानी, लोगों को टायफाइड, पीलिया व पेट की बीमारी का भय

भागलपुर के 12 वार्डों में वाटर वर्क्स से सप्लाई होनेवाला पानी हरा आ रहा है. यह पानी पीने लायक नहीं है.
भागलपुर के 12 वार्डों में वाटर वर्क्स से सप्लाई होनेवाला पानी हरा आ रहा है. यह पानी पीने लायक नहीं है, इतना ही नहीं वाटर वर्क्स के समीप गंगा नाला की तरह हो गयी है. इसके पानी में कीड़े नजर आ रहे हैं. इससे लोग परेशान हैं. उन्हें टायफाइड, पीलिया व अनय पेट की बीमारी का भय बना हुआ है. जबकि अभी बारिश का मौसम शुरू भी नहीं हुआ है. साफ पानी के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे हैं, तो नगर निगम प्रशासन अब जलस्तर बढ़ने का इंतजार कर रहा है. वाटर वर्क्स समीप कीड़े को रोकने के लिए जाली लगायी गयी है. फिर भी छोटे-छोटे कीड़े इंटकवेल के जरिये वाटर वर्क्स के तालाब पहुंच रहे हैं. लोगों ने बताया कि अब यहां गंगा की बजाय नाला ही बचा है. इसमें शहर में बुनकरों समेत अन्य कंपनी का केमिकल वाला पानी, नाला के माध्यम में मल-मूत्र वाला पानी आता है.
38 लाख गैलन से घट कर पिछले कुछ दिनों से 10 से 12 लाख गैलन हुई जलापूर्ति
गंगा के सूखने के बाद शहर में वाटर वर्क्स द्वारा की जा रही हर दिन की जलापूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है. हर दिन होनी वाली 38 लाख गैलन की जगह दस से 12 लाख गैलन जलापूर्ति हो रही है. इससे हर वार्ड में सही तरीके से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. अधिक ब्लिचिंग का इस्तेमाल करने से भी नहीं बदला पानी का रंगशहर के 24, 25, 26, 28, 29, 19, 22, 23, 18, 36, 20, 21 वार्ड में वाटर वर्क्स जलापूर्ति होती है. यहां अब भी पानी पीने लायक नहीं आ रहा है. अधिक ब्लिचिंग का इस्तेमाल करने से हरे रंग से बदलकर थोड़ा साफ हुआ है. बड़ी खंजरपुर मस्जिद लेन के सलमान अनवर ने बताया कि पानी पीने लायक नहीं है. एक दिन पानी रखने पर तुरंत कीड़ा हो जाता है. कभी-कभी तो सीधे पानी से कीड़ा निकल रहा है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अंजली घोष ने बताया कि पहले पूरा पानी हरा दिखता था. अब पानी साफ जरूर हुआ, लेकिन बदबू कम नहीं है.
रोजाना पेयजल पर 40 लाख से अधिक खर्च कर रहे भागलपुरवासी
यह समस्या जल प्रदूषण के कारण है. इस कारण भागलपुरवासी अब बोरिंग, चापाकल और अन्य स्रोतों से पानी लेने से बचने के लिए जार वाला पानी, वाटर प्यूरीफायर और बंद बोतल वाला पानी खरीदने के लिए मजबूर हो गये हैं. लोग रोजाना 40 लाख रुपये का पानी खरीदकर पीते हैं.
आरओ की बिक्री हुई दुगुनीभागलपुर के आरओ कारोबारी ने बताया कि भागलपुर में 25 कारोबारी हैं, जो कि आरओ की बिक्री कर रहे हैं. चार वर्षों में आरओ की बिक्री दोगुनी हो गयी है. हालांकि आरओ के साथ वे कारोबारी अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी बेचते हैं. रोजाना भागलपुर बाजार से 30 से 35 आरओ की बिक्री होती है, जबकि पहले 12 से 15 आरओ भी मुश्किल से बिकते थे. वहीं आदित्य विजन के मैनेजर संजय कुमार ने बताया कि प्रतिमाह उनके यहां 20 से 25 आरओ की बिक्री होती है. न्यूनतम कीमत 15 हजार है, जबकि अधिकतम 20 हजार तक है. रोजाना भागलपुर बाजार से 3.75 लाख के आरओ की बिक्री होती है.
लोगों का दर्द
दो साल पहले जब नगर निगम प्रशासन से लेकर पीएमओ व प्रदेश के नगर विकास विभाग तक पत्राचार करके आवाज उठायी, तो कुछ हद तक समाधान हुआ था. फिर वहीं स्थिति है.दीपक कुमार पाठक, मुंदीचक
गंदा पानी आने से लोगों में गंभीर बीमारी होने का भय बना हुआ है. दैनिक कार्य करने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है.
ओमप्रकाश पाठक, मुंदीचक इस पानी का इस्तेमाल किसी काम में नहीं हो पा रहा है. चाहे कपड़े धोने में हो या बर्तन धोने में. आरओ में भी पानी साफ नहीं होता है. बदबू आती है. पैर हाथ धोने पर खुजली होती है. रीता देवी, पटल बाबू रोडलगातार बदबूदार पानी आने से स्वास्थ्य खराब हो रहा है. जबकि इस पानी को पीने में इस्तेमाल नहीं किया जारहा है. कपड़ा धोने व बर्तन धोने से भी परेशानी हो रही है.
नीलम देवी, पटल बाबू रोड
पहले सप्लाई पानी से ही काम चल जाता था, लेकिन जब से पानी गंदा आ रहा है, तब से अपने बोरिंग का इस्तेमाल करने को विवश हैं. अतिरिक्त बिजली बिल खर्च हो रहा है.
अंजनी शर्मा, मंदरोजाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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