नवगछिया में मक्का किसानों की बढ़ी परेशानी, उचित मूल्य न मिलने से गहराया आर्थिक संकट

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नवगछिया में मक्का किसानों की बढ़ी परेशानी, उचित मूल्य न मिलने से गहराया आर्थिक संकट

भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र के मक्का किसानों को इस वर्ष फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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गोपालपुर से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट :

भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र के मक्का किसानों को इस वर्ष फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि एक ओर खेती में लगातार लागत बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर बाजार में मक्के का दाम अपेक्षाकृत बेहद कम मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है.

एक एकड़ में 25 से 35 हजार रुपये आ रही लागत

किसानों ने बताया कि मक्का की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशक पर काफी खर्च आता है. एक एकड़ मक्का की खेती में औसतन 25 से 35 हजार रुपये तक की लागत लग जाती है. उन्नत बीज में 3 से 5 हजार रुपये, खाद व उर्वरक में 6 से 8 हजार रुपये, सिंचाई व डीजल में 5 से 7 हजार रुपये, मजदूरी व अन्य कार्य में 8 से 10 हजार रुपये खर्च होता है. फसल तैयार होने के बाद बाजार में मक्के का मूल्य उनकी अपेक्षा से काफी कम मिल रहा है. कई किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान दर पर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. किसानों के अनुसार यदि उचित समर्थन मूल्य या बाजार में संतोषजनक दर नहीं मिली, तो भविष्य में मक्का उत्पादन पर इसका बेहद बुरा असर पड़ सकता है.

घरेलू खर्च और बच्चों की पढ़ाई पर संकट

स्थानीय किसान पंकज सिंह, सुनील चौधरी और मनोज कुंवर ने कहा कि मक्के की सही कीमत नहीं मिलने से घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों को पूरा करने में काफी परेशानी उठानी पड़ेगी.

आंधी-तूफान की मार और लीज पर खेती करने वालों का दर्द

लीज (बटाई) पर मक्के की खेती करने वाले किसान बट्टू हरिजन, सुबोध राय और कैलाश यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि इस वर्ष आंधी-तूफान के कारण फसल को पहले ही काफी नुकसान हुआ था. अब जब फसल तैयार होकर बाजार में आयी है, तो उचित कीमत नहीं मिल रही है. ऐसी स्थिति में घाटा सहकर लीज पर खेती करना अब संभव नहीं लग रहा है.

सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग

किसानों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि मक्का के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अनुरूप सरकारी खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि किसानों को उनकी मेहनत और लागत के अनुसार उचित लाभ मिल सके. स्थानीय किसानों का कहना है कि खेती के प्रति लोगों का रुझान बनाये रखने के लिए सरकार को कृषि लागत और बाजार मूल्य के बीच संतुलन बनाने की दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए.

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संजीव झा

लेखक के बारे में

By संजीव झा

संजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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