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कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के भवन का टेंडर 27 से बढ़ कर 35 करोड़ कैसे हो गया

Updated at : 25 Nov 2024 9:27 PM (IST)
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कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के भवन का टेंडर 27 से बढ़ कर 35 करोड़ कैसे हो गया

- विधायक अजीत शर्मा ने डीएम व नगर आयुक्त को पत्र लिख कर उठाये कई सवाल

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वरीय संवाददाता, भागलपुर भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने डीएम को पत्र लिख कर स्मार्ट सिटी योजना से हुए काम को लेकर कई सवाल उठाये. पत्र को स्मार्ट सिटी लिमिटेड के निदेशक सह नगर आयुक्त को भी दिया गया. साथ ही, शहर में कराये गये काम को लेकर आम जनता के हित में सुधार करने की मांग की. विधायक ने पत्र में लिखा है कि इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के भवन का टेंडर 27 करोड़ रुपये में तय हुआ था. यह बढ़ कर 35 करोड़ रुपये कैसे हो गया. ट्रैफिक लाइट, कैमरा, एलइडी स्क्रीन, कॉल बॉक्स, एनाउंस सिस्टम सहित सॉफ्टवेयर का टेंडर 197 करोड़ का था, बढ़ कर 234.71 करोड़ कैसे हो गया. स्मार्ट सड़क बनाने के लिए कितने का टेंडर हुआ था, इसके निर्माण की लागत 350 करोड़ हो गयी. भैरवा तालाब का काम पूरा नहीं : भैरवा तालाब का सौंदर्यीकरण के लिए 185 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ, जो बाद में 38 करोड़ हो गया. भैरवा तालाब के लिए कंपनी को 29 करोड़ अग्रिम के रूप में क्यों दिया गया. जबकि संवेदक ने 38 करोड़ के अलावा अतिरिक्त 12 करोड़ रुपये का दावा किया है. तालाब का काम पूरा नहीं हुआ है. सैंडिस के पश्चिमी द्वार का कोई उपयोग नहीं : सैंडिस कंपाउंड के पश्चिमी मुख्य द्वार पर 38 लाख रुपये खर्च किया गया है जिसका वर्तमान में उपयोग नहीं हो रहा है. इसमें चहारदीवारी क्यों दी गयी है. चहारदीवारी का निर्माण दो फीट छोड़ कर किया गया था. इसमें पौधे लगाने थे, इसे अतिक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया है. कंपाउंड के तीन ओर नाले के स्लैब को ऊपर चेकर टाइल्स बिछाकर वाकिंग ट्रैक बनाया गया था. इस पर गंदगी और अतिक्रमण के कारण शहरवासी इसके उपयोग से वंचित हैं. स्मार्ट सिटी ने जितने भी पौधे लगाये गये थे, अधिकतर पौधे रख रखाव के अभाव में नष्ट हो चुके है. सैंडिस में पांच प्याऊ बना था, इनमें से दो ही चालू हैं. सैंडिस कंपाउंड में डिजनीलैंड मेला क्यों लग रहा : सैंडिस कंपाउंड के प्रवेश द्वार के बाहर फुटपाथ को वाहन पार्किंग की जगह को डिजनीलैंड मेला लगाने वाली अचिंत्या उमंग ग्रुप को किराये पर दिया गया है, जबकि यहां स्थायी पार्किंग है. कंपाउंड की जो जमीन पैरेड, खेलकूद व सैनिक भर्ती के अभ्यास के लिए था, उसे डिजनीलैंड मेला लगाने के लिए दिया गया. जबकि यह जगह सरकारी आयोजन के लिए था. मामला कोर्ट में फिर कैसे मिली संचालन की जिम्मेदारी : सैंडिस कंपाउंड में 2018 में डिजनीलैंड मेला लगाने के लिए जिला प्रशासन ने संजय कुमार पांडेय को अनुमति दी थी. मामले पर संजय द्वारा जिला प्रशासन पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर किया था, जो अभी भी लंबित है. फिर उनके पुत्र नीरज पांडेय के फर्म को मेला लगाने क्यों दिया गया है. भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने विजयश्री प्रेस को निविदा शर्तों पर सैंडिस के संचालन को दिया था. बाद में अधिकार छीन लिया गया. सैंडिस के संचालन के निविदा शर्तों में कई विसंगतियां हैं. एक कमेटी गठित कर सुधार किया जा सकता है. क्या आगामी एजेंसी निविदा शर्तों पर सैंडिस का संचालन कर पायेगी. जयप्रकाश उद्यान के दो तालाबों का जीर्णोद्धार नहीं : जयप्रकाश उद्यान में दो तालाब हैं, जो असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है. जिला प्रशासन के स्तर से जल जीवन हरियाली योजना से इसके जीर्णोद्धार करने की बात हुई थी. नगर निगम द्वारा अमृत मिशन 2.0 के तहत योजना में शामिल किया गया है. बावजूद इसका न जीर्णोद्धार हुआ और न ही सौन्दर्यीकरण. सैंडिस के बाहरी क्षेत्र को ग्रीन जोन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है. बूढ़ानाथ पार्क को लेकर सवाल : बूढ़ानाथ पार्क के विकास को लेकर नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी योजना के तहत कार्य कराया गया है. यहां डिजनीलैंड मेला लगाने की अनुमति दी गयी. वाॅकिंग ट्रैक के बगल में दुकान खोली जा रही है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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