भागलपुर में 72 आयुष चिकित्सक मरीजों को लिख रहे एलोपैथिक दवा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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आयुष चिकित्सक की सांकेतिक तस्वीर.

आयुष चिकित्सक की सांकेतिक तस्वीर.

Bhagalpur AYUSH Doctors : भागलपुर जिले में 72 आयुष चिकित्सकों द्वारा एलोपैथिक उपचार किए जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञता के अनुरूप दवाओं की अनुपलब्धता और स्पष्ट नीति की कमी ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है।

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Bhagalpur AYUSH Doctors : भागलपुर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और अन्य सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों से एलोपैथिक दवाएं लिखवाने और मरीजों का उपचार कराने की व्यवस्था वर्षों से जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था पर स्पष्ट नीति और जवाबदेही तय होना आवश्यक है.

72 आयुष चिकित्सक कर रहे एलोपैथिक उपचार

जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में तैनात 72 आयुष चिकित्सकों को ओपीडी और अन्य सेवाओं में एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज करने की जिम्मेदारी दी गई है. इनमें आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक शामिल हैं.

विशेषज्ञता का उपयोग नहीं होने पर सवाल

आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति उनकी संबंधित चिकित्सा पद्धति के अनुसार की जाती है. इसके बावजूद उनसे एलोपैथिक दवाएं लिखवाना और उसी पद्धति से इलाज कराना कई सवाल खड़े करता है. चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक चिकित्सा प्रणाली का प्रशिक्षण, उपचार पद्धति और दवाएं अलग होती हैं. ऐसे में किसी अन्य प्रणाली से नियमित उपचार कराना मरीजों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर विषय है.

एलोपैथिक डॉक्टरों की कमी बनी वजह

सूत्रों के अनुसार जिले में एलोपैथिक चिकित्सकों की कमी के कारण आयुष चिकित्सकों को ओपीडी और कई स्थानों पर इमरजेंसी सेवाओं में भी लगाया गया है. यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है, लेकिन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट सार्वजनिक नीति सामने नहीं आई है.

मरीजों को नहीं दी जाती जानकारी

ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज कराने वाले अधिकांश मरीजों को यह जानकारी तक नहीं होती कि उनका इलाज आयुष चिकित्सक कर रहे हैं या एलोपैथिक चिकित्सक. ऐसे में यदि इलाज के दौरान कोई जटिलता या दवा का प्रतिकूल प्रभाव सामने आता है, तो जवाबदेही किसकी होगी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

आयुष पद्धति की दवाओं का अभाव

सूत्रों के मुताबिक वर्षों से आयुष चिकित्सकों को उनकी चिकित्सा पद्धति के अनुरूप पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं. इस कारण वे आयुर्वेद, होम्योपैथी या यूनानी पद्धति से उपचार नहीं कर पा रहे हैं और मरीज भी इन सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.

भाव्या आईडी नहीं बनने से बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार जिले के कई आयुष चिकित्सकों की अब तक भाव्या आईडी जनरेट नहीं हो सकी है. नई व्यवस्था के तहत सरकारी चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन किए गए उपचार का डेटा इसी आईडी पर दर्ज किया जाता है. आईडी नहीं बनने के कारण चिकित्सकों के कार्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं हो पा रहा है.

क्या कहती हैं अलग-अलग आयुष पद्धतियां

आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों, पंचकर्म, आहार और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से उपचार किया जाता है. होम्योपैथी में 'समरूपता के सिद्धांत' के आधार पर अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में दवाओं का उपयोग कर शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने का प्रयास किया जाता है. वहीं यूनानी चिकित्सा में हर्बल दवाओं, खानपान, व्यायाम और दिनचर्या में सुधार के जरिए उपचार किया जाता है.

प्रभारी जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी ने क्या कहा

प्रभारी जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्याम नारायण प्रसाद ने कहा कि आयुष चिकित्सकों को उनकी संबंधित चिकित्सा पद्धति से इलाज करने के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप मरीजों का उपचार कर सकें.


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Atul Kumar

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