कहलगांव में प्रसूता की मौत मामले में आशा से स्पष्टीकरण, 48 घंटे में जवाब नहीं देने पर होगी कार्रवाई

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कहलगांव में प्रसूता की मौत मामले में आशा से स्पष्टीकरण, 48 घंटे में जवाब नहीं देने पर होगी कार्रवाई

प्रसूता की मौत मामले में एएनएम से स्पष्टीकरण, 48 घंटे में मांगा जवाब

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कहलगांव, भागलपुर से असद अशरफी की रिपोर्ट

Bhagalpur News : कहलगांव के मसूदनपुर में प्रसूता पूजा कुमारी की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कहलगांव प्रशासन ने संबंधित आशा कार्यकर्ता से स्पष्टीकरण मांगा है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मामले में लापरवाही बरती गई है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है और 48 घंटे के भीतर जवाब देना अनिवार्य है.

Bhagalpur News : 48 घंटे में जवाब देने का निर्देश

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र में आशा कार्यकर्ता शोभा कुमारी को निर्देश दिया गया है कि वे 48 घंटे के भीतर पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण दें. पत्र में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी.

घर पर प्रसव और तीन नवजातों का जन्म

जानकारी के अनुसार, 3 जुलाई को मसूदनपुर निवासी सत्यनारायण राम की पत्नी पूजा कुमारी का प्रसव घर पर हुआ. इस दौरान उन्होंने तीन नवजात शिशुओं को जन्म दिया. प्रसव के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

सरकारी निर्देशों के बावजूद संस्थागत प्रसव नहीं

स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि सभी गर्भवती महिलाओं का प्रसव सरकारी अस्पताल में ही कराया जाए. इसके बावजूद इस मामले में महिला को संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया. इसे गंभीर लापरवाही और कार्य के प्रति उदासीनता माना जा रहा है.

लापरवाही पर उठे सवाल, जांच के आदेश

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने अपने पत्र में यह भी पूछा है कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिला का सरकारी अस्पताल में प्रसव नहीं कराया गया. विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

आगे की कार्रवाई संभव

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मामले को उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा और संबंधित कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Asad Ashrafi

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