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बिहार कृषि विवि : नियुक्ति में गड़बड़ी, पूर्व वीसी व जदयू विधायक मेवालाल पर प्राथमिकी दर्ज

Updated at : 22 Feb 2017 6:17 AM (IST)
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बिहार कृषि विवि : नियुक्ति में गड़बड़ी, पूर्व वीसी व जदयू विधायक मेवालाल पर प्राथमिकी दर्ज

सबौर (भागलपुर) : बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी के मामले में विवि के पूर्व कुलपति डॉ मेवालाल चौधरी और अन्य पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. मेवालाल चौधरी वर्तमान में मुंगेर जिले के तारापुर के जदयू विधायक हैं. राज्यपाल के अादेश पर वर्तमान कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने सबौर […]

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सबौर (भागलपुर) : बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी के मामले में विवि के पूर्व कुलपति डॉ मेवालाल चौधरी और अन्य पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. मेवालाल चौधरी वर्तमान में मुंगेर जिले के तारापुर के जदयू विधायक हैं. राज्यपाल के अादेश पर वर्तमान कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने सबौर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था. केस के सूचक बीएयू के रजिस्ट्रार अशोक कुमार हैं. कांड का अनुसंधानकर्ता डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार हैं.

सबौर थाना कांड संख्या 35/2017 भादवि की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी, आदि के तहत मामला दर्ज किया गया है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच की जद में आनेवाले लोगों के बीच हड़कंप है. मुख्य आरोपित पूर्व कुलपति डॉ मेवालाल चौधरी कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं. तकरीबन 20 साक्षात्कार कमेटियों ने 161 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था, जिनमें विवि के 30 से ज्यादा वरीय पदाधिकारी शामिल हैं. जांच की आंच उन तक पहुंच सकती है. साक्षात्कार कमेटियों के प्रत्येक सदस्य से पुलिस पूछताछ करनेवाली है. कई अभ्यर्थी भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकते हैं. बीएयू के कई वरीय पदाधिकारियों पर भी पुलिस अनुसंधान की गाज गिर सकती है.

इसके साथ ही तिलका मांझी भागलपुर विवि के दो लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं. पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि नियुक्त हुए कुछ अभ्यर्थियों की पहुंच की कड़ी कहां-कहां से जुड़ी है. इस जांच के दायरे में कई लोग आ सकते हैं.

राजनीति के तहत फंसाया जा रहा : डॉ मेवालाल

डॉ मेवालाल चौधरी का कहना है कि नियुक्ति पूरी एक कमेटी मिल कर करती है. फिर उसमें एक व्यक्ति कैसे जिम्मेदार हो सकता है. वहां भी काफी पारदर्शिता होती है. नियुक्ति करना किसी एक के बस की बात नहीं है. प्रमाणपत्र सही और बेहतर होने के बाद भी प्रस्तुतीकरण व साक्षात्कार में अभ्यर्थी पिछड़ते हैं. जिनका चयन नहीं हुआ, उनकी नाराजगी हुई और इसी असंतोष का इस्तेमाल कर राजनीति के तहत दबाव में मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि मैं स्वयं एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ हूं. मेरी कर्मठता कई विरोधियों को खलती है. इस कारण मुझे फंसाया जा रहा है. मैं बिल्कुल ही निर्दोष हूं.

वीसी के पद से रिटायर होने के बाद बने विधायक
मुख्य आरोपित डॉ मेवालाल चौधरी फूल के वरीय वैज्ञानिक हैं. केंद्र सरकार के वरीय पद पर भी काम किया है. राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति रहे. जब ये कुलपति थे, तो इनकी पत्नी नीता चौधरी तारापुर की जदयू विधायक थीं. रिटायर होने के बाद डॉ मेवालाल ने 2015 में पत्नी की जगह खुद जदयू के टिकट पर तारापुर से विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए.
बीएयू में 2012 में 161 सहायक प्राध्यापक और कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति की गयी, जिसमें इंटरव्यू में अनियमितता की बात सामने आयी थी. आरोप है कि नियुक्ति के िलए 15 से 20 लाख रुपये की बोली लगी थी, इसलिए कम योग्यता वाले अभियार्थियों की नियुक्ति कर दी गयी, जबकि योग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार और प्रोजेक्ट में बेहद कम अंक देकर अयोग्य करार दिया गया. इस मामले की जांच के लिए 21 जून, 2016 को राजभवन ने हाइकाेर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस महफूज आलम की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी गठित

क्या है मामला…
बीएयू में 2012 में 161 सहायक प्राध्या पक और कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति की गयी, जिसमें इंटरव्यू में अनियमितता की बात सामने आयी थी. आरोप है कि नियुक्ति के लिए 15 से 20 लाख रुपये की बोली लगी थी, इसलिए कम योग्यता वाले अभियार्थियों की नियुक्ति कर दी गयी, जबकि योग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार और प्रोजेक्ट में बेहद कम अंक देकर अयोग्य करार दिया गया. इस मामले की जांच के लिए 21 जून, 2016 को राजभवन ने हाइकाेर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस महफूज आलम की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी गठित की.

कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन कुलपति और नियुक्ति कमेटी के अध्यक्ष डॉ मेवालाल चौधरी को मुख्य रूप से दोषी ठहराया था और कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की. जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने बीएयू के कुलपति को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इस निर्देश के बाद कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने कानूनी सलाह लेकर सोमवार को प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन थाने को दिया. अब गेंद पुलिस के पाले में है. हालांकि हाइप्रोफाइल मामला होने की वजह से पुलिस भी इस मामले में काफी सतर्कता बरत रही है.

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