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पानी के लिए पानी में बहा दिये 50 लाख, नहीं हुई स्थायी व्यवस्था

Updated at : 11 Jan 2020 3:10 AM (IST)
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पानी के लिए पानी में बहा दिये 50 लाख, नहीं हुई स्थायी व्यवस्था

भागलपुर : हर गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचता है. इस दौरान गंगा का पानी भी सूखता है. इस कारण चैनल बना कर गंगा का पानी वाटर वर्क्स तक लाया जाता है. पिछले तीन साल में सिर्फ चैनल बनाने के नाम पर निगम ने 50 लाख रुपये खर्च कर दिये हैं, पर कोई स्थायी […]

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भागलपुर : हर गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचता है. इस दौरान गंगा का पानी भी सूखता है. इस कारण चैनल बना कर गंगा का पानी वाटर वर्क्स तक लाया जाता है. पिछले तीन साल में सिर्फ चैनल बनाने के नाम पर निगम ने 50 लाख रुपये खर्च कर दिये हैं, पर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गयी. इस वर्ष भी इस काम के लिए लाखों का बजट तय किया गया है. फिलहाल सिर्फ 10 लाख की लागत से प्लेटफार्म बनाने का काम चल रहा है. जानकारों के अनुसार सही प्लानिंग से अगर निगम कोई व्यवस्था करता तो यह स्थिति नहीं रहती.

जनता के टैक्स से मिले 50 लाख रुपये भी पानी में नहीं जाते, उससे विकास के काम होते. याद रहे पिछले वर्ष तक शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था, पाइप लाइन बिछाने की जवाबदेही पैन इंडिया के जिम्मे थी. काम की गति ठीक नहीं होने के कारण उसे हटा दिया गया. इसके बाद 1 जुलाई 2019 से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था निगम के जिम्मे दे दिया गया. इस काम के मिलने के बाद भी निगम ने अपनी कोई खास व्यवस्था नहीं की. पानी की जांच से लेकर अन्य कई चीजों में कमी जारी है.
इधर, इस वर्ष भी गंगा के जलस्तर में तेजी से गिरावट जारी है. अभी से ही वाटर वर्क्स के दोनों इंटक वेल के पास पानी बहुत कम हो गया है. गाद भरने की वजह से एक माह से ड्राय इंटक वेल बंद है. सिर्फ वेट इंटक वेल से आधे शहर को जलापूर्ति हो रही है. शहर के शेष हिस्से में बोरिंग से जलापूर्ति हो रही है. निगम ने जल संकट न हो इसके लिए पिप्पली धाम घाट से जलापूर्ति की तैयारी में लगा है. इसके लिए वहां पर अभी 10 लाख की लागत से निर्माण कार्य जारी है. यह लागत अभी कई लाख तक जायेगी.
पैन इंडिया के पदचिह्नों पर चला निगम, हर साल खोदों और पीयो : ज्ञात हो कि इंटक वेल के पास गंगा का पर्याप्त पानी नहीं मिलने से 2016-17 में जलापूर्ति व्यवस्था देख रही पैन इंडिया एजेंसी ने पिप्पली घाम घाट के पास चैनल बना वहां से पानी लाने के लिए छह माह की अस्थायी व्यवस्था की थी. इस व्यवस्था पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च हुए.
बरसात में गंगा में पानी भर गया, तो पिप्पली धाम घाट से मोटर हटा लिया गया. एजेंसी ने पुन: 2017-18 में चैनल से पानी लाने की व्यवस्था की. इस पर भी लगभग 15 लाख रुपये खर्च हुए. 2018-19 में भी यही व्यवस्था की गयी और लगभग 15 लाख रुपये खर्च किये गये. अब जब एजेंसी हट गयी, तो निगम भी पिप्पलीधाम से पानी लाने में लगभग इतनी ही राशि खर्च करने जा रहा है. निगम की जलकल शाखा इसकी तैयारी में लगा है.
की जाती सही व्यवस्था, तो कम पैसे में होता स्थायी समाधान : अगर पानी लाने की स्थायी व्यवस्था की जाती, तो हर साल इतना पैसा खर्च नहीं होता. बाबूपुर मोड़ के पास गंगा घाट से पाइप से इंटक वेल तक पानी लाने के लिए पिछले साल भी बुडको और पैन इंडिया की टीम गयी थी, स्टीमेट भी बना. बुडको भागलपुर कार्यालय ने लगभग दो करोड़ रुपये का स्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा, लेकिन स्वीकृति ही नहीं मिली.
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