मायागंज व सदर अस्पताल की आउटडोर सेवा ठप, 3000 मरीज लौट गये बिना इलाज कराये
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Aug 2019 8:56 AM (IST)
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भागलपुर : मायागंज अस्पताल परिसर में बुधवार को डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) 2019 के विरोध नारेबाजी व धरना-प्रदर्शन किया. 11 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन के बाद डॉक्टरों ने मायागंज अस्पताल की ओपीडी सेवा भी बाधित कर दी. डेढ़ हजार से अधिक मरीजों को बगैर इलाज के ही लौटना […]
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भागलपुर : मायागंज अस्पताल परिसर में बुधवार को डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) 2019 के विरोध नारेबाजी व धरना-प्रदर्शन किया. 11 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन के बाद डॉक्टरों ने मायागंज अस्पताल की ओपीडी सेवा भी बाधित कर दी. डेढ़ हजार से अधिक मरीजों को बगैर इलाज के ही लौटना पड़ा. इस दौरान इलाज के लिए मरीज इधर-उधर भटकते रहे. हड़ताल के दौरान अस्पताल परिसर से दो मरीजों के शव को ट्रॉली से बाहर निकाला.
पहले मृतक का नाम प्रियंका कुमारी है, वह बांका बल्लीकित्ता की निवासी थी. वहीं, दूसरे मरीज का नाम उदित नारायण ठाकुर था, वह लोदीपुर के निवासी थे. इसके अलावा देर रात तक 11 मरीजों की मौत की बात सामने आयी. इस मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ आरसी मंडल ने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी सेवा बाधित नहीं की गयी थी.
गंभीर मरीजों का इलाज किया गया है. दोनों मरीजों की मौत नेचुरल डेथ है. अस्पताल परिसर में गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों की औसतन 8-10 संख्या में मौत होती है. मायागंज अस्पताल के अलावा सदर अस्पताल परिसर में भी ओपीडी ठप रही. दोनों अस्पताल मिलाकर करीब 3000 मरीजों का इलाज नहीं हुआ. प्राइवेट अस्पतालों में भी रूटिन चेकअप नहीं हुआ.
सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज किया गया. सामान्य मरीज का इलाज नहीं होने के कारण इन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. दोपहर तक इंतजार कर सभी मरीज व परिजन निराश होकर लौट गये. मायागंज अस्पताल में सुबह नौ बजे से शुरू हुए ओपीडी में 550 से अधिक मरीज अपना चेकअप करा चुके थे. प्रदर्शन के कारण ओपीडी को बंद करना पड़ा.
पीएम का पुतला फूंका
मायागंज अस्पताल में प्रदर्शन का आयोजन आइएमए भागलपुर व जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के बैनर तले किया गया. प्रदर्शन के दौरान राज्य स्वास्थ्य मंत्री व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. डॉक्टरों ने एनएमसी बिल के प्रस्ताव लिखे पंफलेट को फाड़कर बिल को वापस लेने की मांग की. मौके पर लोकसभा में बिल पास होने का विरोध करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला भी दहन किया गया.
आइएमए के अध्यक्ष डॉ संजय कुमार ने बताया कि पटना मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद धरना प्रदर्शन किया गया. बुधवार सुबह 6:30 बजे से गुरुवार सुबह 6:30 बजे तक सभी डॉक्टर मरीजों का इलाज बंद रखेंगे. यह बिल लोकसभा में मंगलवार को पास कर दिया गया है. अब डॉक्टरों का आंदोलन थमने वाला नहीं है.
डॉक्टर व परिजन के बीच हाथापाई
भागलपुर . सदर अस्पताल परिसर में बुधवार शाम को चिकित्सक डॉ राजू व बच्चे के इलाज के लिए आये एक व्यक्ति के बीच हाथापाई व धक्का-मुक्की हाे गयी. बच्चे के परिजन डॉक्टर पर खांसी के इलाज के लिए एक्स-रे कराने का दबाव बना रहे थे. वहीं, डॉक्टर बिना एक्स-रे के ही ठीक होने की बात कह रहे थे. बात इतनी बढ़ गयी कि मामला हाथापाई तक जा पहुंचा.
हंगामा कर रहे व्यक्ति ने डॉक्टर को देख लेने की धमकी दी. किसी तरह बाकी परिजनाें ने मामले काे शांत कराया. दरअसल डाॅक्टराें की हड़ताल की वजह से सदर अस्पताल की अाेपीडी में शाम काे अचानक भीड़ बढ़ गयी. सिविल सर्जन डाॅ. विजय कुमार ने बताया कि सुरक्षा गार्ड के लिए पटना मुख्यालय से मांग की गयी है. बिना गार्ड के अस्पताल में आये दिन अव्यवस्था हो रही है.
पेड़ के नीचे रात गुजारेंगे, गुरुवार की आेपीडी में जांच करायेंगे
कटिहार के कदवा प्रखंड से चार साल की प्रिया कुमारी का इलाज कराने पहुंचे परिजनों ने बताया कि बच्ची के हार्ट में परेशानी है. बच्ची को पहली बार भागलपुर में इलाज के लिए लेकर पहुंचे हैं. अस्पताल परिसर में पेड़ के नीचे रात गुजारेंगे. गुरुवार को आेपीडी में इसकी जांच कराएंगे.
वहीं, चंपानगर से खून की जांच कराने आये सचिन कुमार ने बताया कि ऑटो रिजर्व करने में 200 रुपये खर्च हो गये. वहीं चौका सजौर से आई मरीज रवि देवी ने बताया कि मैं टीबी की मरीज हूं. डॉक्टरों ने बुधवार को चेकअप के लिए बुलाया था. पेशेंट ने बताया कि टीबी के कारण तकलीफ बढ़ गयी है. डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी था.
आमलोगों को इलाज कराना अब पड़ेगा महंगा
धरना-प्रदर्शन को संबाेधित करते हुए डॉक्टरों ने कहा कि बिल के कारण मेडिकल की पढ़ाई, दवा, उपकरण, जांच सब महंगे हो जायेंगे. इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ने वाला है. शिक्षा की तरह स्वास्थ्य सेवा का व्यवसायीकरण करने का प्रपंच शुरू हो गया है.
आइएमए भागलपुर सचिव डॉ अमिताभ कुमार सिंह ने कहा कि एनएमसी बिल की धारा 32 में आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अभ्यास करने के लिए 3.5 लाख अयोग्य गैर-चिकित्सा व्यक्तियों को लाइसेंस देने का प्रावधान है. आइएमए के निर्देश पर 24 घंटे तक जिले के सभी नर्सिंग होम और अस्पताल को बंद रखा जायेगा. केवल आपातकालीन, नकद, आइसीयू और संबंधित सेवाओं को बाधित नहीं किया जायेगा.
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