सुल्तानगंज विधायक सुबोध राय भी हो गये ‘गरीब’

संजय निधि भागलपुर : जिले में गरीबी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां के सुल्तानगंज के विधायक सुबोध राय सहित विश्वविद्यालय के कई कर्मचारी भी ‘गरीब’ हैं. श्री राय भागलपुर के सांसद भी रह चुके हैं तथा वे विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं. ऐसे लोग भी गरीबी रेखा के […]
संजय निधि
भागलपुर : जिले में गरीबी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां के सुल्तानगंज के विधायक सुबोध राय सहित विश्वविद्यालय के कई कर्मचारी भी ‘गरीब’ हैं. श्री राय भागलपुर के सांसद भी रह चुके हैं तथा वे विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं. ऐसे लोग भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते सरकारी नौकरी में हैं, बैंक कर्मी हैं या पेंशनभोगी हैं.
ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि यहां की प्रशासन व सरकार कह रही है. जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बनी लाभुकों की सूची में इस तरह के लोगों के भी नाम हैं और ऐसे लोग भी सरकारी योजना के तहत पीडीएस डीलर से दो व तीन रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं व चावल प्राप्त कर सकते हैं.
पूरे प्रदेश में हंगामा : सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुकों के लिए बने राशन कार्ड में गड़बड़ी को लेकर पूरे प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है.
जिले में भी इसको लेकर लगातार आंदोलन हो रहा है. जनगणना के बाद लाभुकों की सूची तय करने में किस हद तक लापरवाही बरती गयी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विधायक व बैंक कर्मी जैसे लोगों के नाम भी इस सूची में दर्ज हो गये हैं. नियमत: इस सूची में बीपीएल परिवारों के नाम होने चाहिए थे. सुलतानगंज विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक नरगा निवासी सुबोध राय का नाम भी इस सूची में दर्ज है. उनका प्रगणन खंड (इबी) 31 और गृह संख्या 28 है. यही नहीं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत कई कर्मचारियों व उनके परिवार के नाम भी बीपीएल सूची में दर्ज हैं और वह खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुक बन गये हैं.
डाटा निकालने में हुई गड़बड़ी
खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बनने वाले राशन कार्ड का आधार सामाजिक, आर्थिक व जातिगत जनगणना (एसइसीसी) रखा गया था. खाद्य सुरक्षा योजना का लाभुक बीपीएल को बनाया गया है और उसके लिए मानदंड निर्धारित किये गये थे. इस मानदंड के अनुसार सरकारी नौकरी पेशा, पेंशनभोगी, तीन कमरे का पक्का मकान, आयकर दाता, पांच एकड़ की सिंचित भूमि वाले किसान, दो पहिया या चार पहिया वाहन धारक आदि इस श्रेणी में शामिल नहीं हो सकते हैं. जनगणना के दौरान घर-घर जाकर गणना कर्मी ने निर्धारित फॉर्मेट में सारी जानकारी दर्ज की. इसे बाद में गणन खंड वार कंप्यूटर में अपलोड कर दिया गया. कंप्यूटर में अपलोड डाटा से निर्धारित मानदंड के अनुसार बीपीएल की पात्रता रखने वाले परिवारों की सूची निकाल ली गयी. यहीं सबसे बड़ी गड़बड़ी हुई.
अंधाधुंध तरीके से सूची निकाली गयी और इसकी कोई जांच नहीं की गयी. क्योंकि जिन संपन्न लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुकों की सूची में है, इबी में उनके नाम के आगे उनका पेशा और घर की स्थिति आदि स्पष्ट रूप से लिखी है. मसलन, विधायक सुबोध राय के नाम के साथ उनका वास्तविक पेशा, घर की स्थिति, घर में उपलब्ध संसाधन, वार्षिक आमदनी, आयकर आदि संबंधी जानकारी दर्ज है, बावजूद इसके उनका नाम खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुकों की सूची में भी दर्ज हो गया है.
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