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भागलपुर : रेलवे पावर सब स्टेशन तैयार, लेकिन चालू नहीं हुआ, जंक खा रही मशीनें

Updated at : 28 Jan 2019 6:51 AM (IST)
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भागलपुर : रेलवे पावर सब स्टेशन तैयार, लेकिन चालू नहीं हुआ, जंक खा रही मशीनें

भागलपुर : रेलवे का पावर सब स्टेशन दो साल पहले से बन तैयार है मगर, यह चालू नहीं हो सका है. चालू होने के इंतजार में अब यहां की मशीनें जंक खा रही हैं. पावर सब स्टेशन पूरी तरह से अमरबेल(झाड़ियां) से ढक गयीं हैं. कई मशीनें तो कबाड़ हो गयी हैं. भागलपुर जंक्शन को […]

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भागलपुर : रेलवे का पावर सब स्टेशन दो साल पहले से बन तैयार है मगर, यह चालू नहीं हो सका है. चालू होने के इंतजार में अब यहां की मशीनें जंक खा रही हैं. पावर सब स्टेशन पूरी तरह से अमरबेल(झाड़ियां) से ढक गयीं हैं. कई मशीनें तो कबाड़ हो गयी हैं. भागलपुर जंक्शन को बेहतर बिजली अापूर्ति के लिए डेढ़ करोड़ खर्च कर पावर सब स्टेशन का निर्माण कराया गया है.

यह एक मेगवाट क्षमता का है. इसमें एक-एक एमबीए के दो पावर ट्रांसफॉर्मर लगे हैं, जो कभी चालू ही नहीं हुआ है. यह अगर चालू होता, तो स्टेशन को बिजली की कमी नहीं होती.

मोजाहिदपुर पावर हाउस से नहीं मिलती निर्बाध बिजली : भागलपुर जंक्शन को मोजाहिदपुर पावर हाउस से ही बिजली मिलती रही है मगर, हमेशा निर्बाध आपूर्ति नहीं होती है. जेनसेट के भरोसे रहना पड़ता है. खुद के पावर सब स्टेशन से आपूर्ति होती, तो मोजाहिदपुर पावर हाउस पर से निर्भरता खत्म हो जाती.
बिजली विभाग 12 साल बाद भी रेलवे के पावर सब स्टेशन को सबौर ग्रिड से खींच कर नहीं दे सका है 33 हजार वोल्ट का लाइन
लाइन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नाम पर पहले ले रखा है करोड़ रुपये
केस स्टडी-1
प्लेटफॉर्म-6 : लोड के कारण नहीं हो सकी बिजली की व्यवस्था
प्लेटफॉर्म नंबर छह बनने के बाद भी यहां बिजली की पूरी व्यवस्था नहीं हो सकी है. बिजली का लोड सीमित रखने के लिए कोच पोजिशन इंडिकेटर नहीं लग सका है. बल्ब-बत्ती की संख्या भी नहीं बढ़ायी जा सकी है.
केस स्टडी-2
चाह कर भी नहीं बढ़ायी जा रही हाइमास्ट लाइट की संख्या
बिजली का लोड बढ़ न जाये, इस कारण से चाह कर भी हाइमास्ट लाइट की संख्या बढ़ायी नहीं जा रही है. स्टेशन में तीन और कोचिंग यार्ड में दो हाइमास्ट लाइट लगे हैं. यह जब शाम के बाद जलता है, तो स्टेशन की बिजली ट्रिप करने लगती है.
पावर सब स्टेशन की मशीन का यह है हाल.
पावर सब स्टेशन बन कर तैयार है मगर, 33 हजार वोल्ट का लाइन ही नहीं मिला है. बिजली विभाग सबौर ग्रिड से लाइन खींच कर देगा, तभी यह चालू हो सकेगा. इसके एवज में बिजली विभाग ने पैसा भी लिया है. यह मामला रेलवे बोर्ड को चला गया है.
दिवाकर कुमार झा, वरीय अनुभाग अभियंता (बिजली), भागलपुर रेलवे
यहां फंसा है पेच
बिजली विभाग सबौर ग्रिड से अलग 33 हजार वोल्ट की लाइन खींच कर रेलवे के पावर सब स्टेशन को नहीं दे सका है. इस कारण यह चालू नहीं हुआ है. रेलवे पिछले 12 साल से इस कोशिश में है कि किसी तरह से बिजली विभाग लाइन खींच कर दे, तो पावर सब स्टेशन को चालू कर सके. इस काम के एवज में बिजली विभाग ने शुरुआती दिनों में ही रेलवे से करीब एक करोड़ ले लिया था. बिजली विभाग ने एजेंसी बहाल किया और काम भी शुरू कराया.
तथाकथित एजेंसी ने सबौर और भागलपुर रेलवे के बीच 70 से ज्यादा पोल भी खड़ा कर दिया गया मगर, इसके बाद एजेंसी ने काम करना छोड़ दिया. इसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. रेलवे की ओर जब-जब बिजली विभाग को याद दिलाने की कोशिश की जाती है, तो उनसे संतोषप्रद जबाव नहीं मिलता है. यह मामला अब रेलवे बोर्ड तक चला गया है.
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