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भागलपुर : टीबी ओपीडी कई माह से है बंद, तो मधुमेह की सारी कुर्सियां थीं खाली

Updated at : 14 Dec 2018 4:23 AM (IST)
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भागलपुर :  टीबी ओपीडी कई माह से है बंद, तो मधुमेह की सारी कुर्सियां थीं खाली

भागलपुर : सदर अस्पताल की ओपीडी में कुछ विभाग ऐसे हैं, जहां काम करनेवाले चिकित्सकों व कर्मियों को कार्रवाई का डर नहीं है. कई दिनों तक कोई डॉक्टर आते नहीं और मरीज लौटते रहते हैं, फिर भी किसी को कोई परवाह नहीं. स्थिति यह है कि एक मरीज के परिजन जांच रिपोर्ट लेकर पिछले तीन […]

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भागलपुर : सदर अस्पताल की ओपीडी में कुछ विभाग ऐसे हैं, जहां काम करनेवाले चिकित्सकों व कर्मियों को कार्रवाई का डर नहीं है. कई दिनों तक कोई डॉक्टर आते नहीं और मरीज लौटते रहते हैं, फिर भी किसी को कोई परवाह नहीं.
स्थिति यह है कि एक मरीज के परिजन जांच रिपोर्ट लेकर पिछले तीन दिनों से इसलिए लौट रहे हैं कि उनकी रिपोर्ट देखनेवाले डॉक्टर बैठ नहीं रहे और उनके बैठने की कोई तारीख भी नहीं बता रहे.
ऐसी कई परेशानियां बनी हुई हैं. जिम्मेदार नियमित निगरानी करते भी नहीं. इस कारण भी स्वास्थ्य सुविधा का मतलब ही मनमर्जी हो गया है. सदर अस्पताल की ओपीडी की पड़ताल गुरुवार को प्रभात खबर टीम ने की, तो हालत उत्साहित करनेवाला नहीं था.
कोई विभाग था बंद, तो कोई खुला, पर डॉक्टर थे गायब: सदर अस्पताल की ओपीडी के किसी विभाग में ताले लगे रहे, तो कोई विभाग खुला रहने के बाद भी डॉक्टर और कर्मचारी गायब थे. मरीज आते थे, लेकिन डॉक्टर को न देख या गेट बंद देख लौट जाते थे. दूसरे विभाग के कर्मियों से कई मरीज बंद पड़े विभाग के डॉक्टर के बारे में पूछ रहे थे. लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं था.
यक्ष्मा ओपीडी का गेट था बंद
सरकार टीबी रोग पर नियंत्रण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. इसके लिए अलग विभाग बनाकर मरीजों को महंगी दवा से निजात दिलायी गयी है. लेकिन सदर अस्पताल के ओपीडी का यक्ष्मा विभाग बंद ही रहता है.
कर्मियों का कहना था कि डॉ अशरफ रिजवी का छह माह पहले तबादला हो गया. उसके बाद से यहां कोई डॉक्टर नहीं बैठते. मरीज को दिखाना है, तो यक्ष्मा विभाग में जाना पड़ता है.
यहां मौजूद थे डॉक्टर, मरीज की भी थी कतार
सिर्फ पुरुष जनरल, महिला ओपीडी और टीकारण कक्ष में डॉक्टर और कर्मचारी उपलब्ध थे. पुरुष जनरल व टीकाकरण कक्ष में मरीजों की कतार थी. महिला ओपीडी में कुछ मरीज थे.
दो माह चला टेलीविजन, दो साल से है बंद
ओपीडी हॉल में एक टेलीविजन दो साल पहले लगाया गया था. अस्पताल के लोगों ने बताया कि जिस समय टेलीविजन लगा था, उस समय उसमें दो महीने का रिचार्ज कराया गया था. लेकिन दोबारा इसका रिचार्ज नहीं करवाया नहीं गया.
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