नाग-नागिन से घंटों संघर्ष कर नागिन को रस्सी से बांधा, डंसने से मौत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Oct 2018 7:12 AM
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भागलपुर : एक तरफ रखा था 65 वर्षीय शोभा देवी का शव, दूसरी ओर रस्सी से बंधी और टोकरी के अंदर ढंकी थी नागिन. घर के कोने में छिपा हुआ था नाग और वृद्धा के बगल में थे खून के छींटे. रविवार सुबह का यह दर्दनाक दृश्य यह बताने के लिए काफी था कि रात […]
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भागलपुर : एक तरफ रखा था 65 वर्षीय शोभा देवी का शव, दूसरी ओर रस्सी से बंधी और टोकरी के अंदर ढंकी थी नागिन. घर के कोने में छिपा हुआ था नाग और वृद्धा के बगल में थे खून के छींटे. रविवार सुबह का यह दर्दनाक दृश्य यह बताने के लिए काफी था कि रात में वृद्धा का नाग-नागिन के साथ किस तरह के संघर्ष हुआ होगा. संघर्ष तो हुआ, पर नागिन का जहर वृद्धा झेल नहीं पायी और मौत हो गयी.
यह घटना मिरजानहाट वारसलीगंज स्थित हनुमान मंदिर के सामने सांता क्लॉज स्कूल के बगल में गंगा प्रसाद मंडल के घर की है. गंगा प्रसाद की मां थी शोभा देवी. घटनास्थल पर रविवार सुबह बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे. दरअसल शनिवार रात घर में नाग और नागिन घुस गये थे. दोनों आपस में क्रीड़ा करते हुए सोयी हुई शोभा देवी के पास पहुंच गये.
शोभा देवी को लगा कि कहीं उसे नाग-नागिन डंस न ले. लेकिन स्थिति ऐसी थी कि वहां से निकल पाना मुश्किल था. शोभा देवी को परिवार के अन्य लोगों की चिंता भी थी. आखिरकार उसने नाग-नागिन से मुकाबला करने की ठान ली. नाग-नागिन की तरफ झटके में हाथ बढ़ा कर पकड़ना चाहा. नागिन तो हाथ में आ गयी, पर नाग फिसल गया.
इस दौरान नाग-नागिन ने मिल कर वृद्धा के हाथ पर जोरदार तरीके से डंसना शुरू कर दिया. वृद्धा लहूलुहान हो गयी, पर नागिन को नहीं छोड़ी. एक रस्सी से पहले उसे बांधा. रस्सी का दूसरा सिरा ग्रिल से बांध दिया. फिर नागिन को टोकरी से ढक दी. इस दौरान नाग बगल के कमरे में जाकर छिप गया. इसके बाद वृद्धा की स्थिति बिगड़ने लगी. आखिरकार वह दम तोड़ दी.
संपेरे ने नाग नागिन को कब्जे में लिया
रविवार सुबह शोभा देवी के पुत्र ने संपेरे को बुलाया. संपेरे ने पहले नागिन को रस्सी से मुक्त कर कब्जे में लिया. फिर कमरे में जाकर छिपे नाग को पकड़ कर बोरी में डाला. घटनास्थल पर पहुंची सांता क्लॉज स्कूल की प्राचार्य लता अग्रवाल ने बताया कि शोभा देवी की जीवन और मौत से जुड़ी यह कहानी आश्चर्य से कम नहीं है. भले ही अब वह इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उसकी इस उम्र में बहादुरी ने सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने बताया कि शोभा देवी के पुत्र जब घटना को सुना रहे थे, तो रोंगटे खड़े हो रहे थे.
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