जाते-जाते भी जिंदगी दे सकते हैं आप, बेतिया में अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान

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जागरूकता कार्यक्रम में शामिल बच्चे

बेतिया में अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति ने अंगदान और नेत्रदान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया. इस अभियान के तहत 561 लोगों को ग्रीन रिबन लगाकर अंगदान के लिए प्रेरित किया गया.

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Bettiah News: बेतिया. अंगदान और नेत्रदान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति की बेतिया शाखा की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के तहत समिति की सदस्याएं विभिन्न कार्यक्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को अंगदान के महत्व की जानकारी दे रही हैं. 1 से 13 अगस्त तक अभियान के दौरान 561 लोगों को ग्रीन रिबन लगाकर अंगदान एवं नेत्रदान के लिए जागरूक किया गया.

561 लोगों को लगाया गया ग्रीन रिबन

शाखा अध्यक्ष तारा सोमानी ने बताया कि अभियान के दौरान अब तक 561 लोगों को ग्रीन रिबन लगाकर अंगदान और नेत्रदान का संदेश दिया गया है. समिति की सदस्याएं लोगों को समझा रही हैं कि मृत्यु के बाद भी अंगदान के जरिए किसी जरूरतमंद को जीवन का नया अवसर दिया जा सकता है.

नेत्रदान से लौट सकती है किसी की आंखों की रोशनी

तारा सोमानी ने बताया कि नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने में मदद मिल सकती है. वहीं हृदय, किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण से गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना रहती है.

अंगदान की जरूरत और उपलब्धता में बड़ा अंतर

समिति की ओर से बताया गया कि देश में प्रत्यारोपण योग्य अंगों की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है. ऐसे में अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. समिति का उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करना है.

मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

राष्ट्रीय संस्कार संस्कृति प्रमुख मीना तोदी ने कहा कि अंगदान केवल किसी जरूरतमंद को जीवन देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है. उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग अंगदान और नेत्रदान का संकल्प लें तो भविष्य में कई परिवारों को नई उम्मीद मिल सकती है.

जागरूकता अभियान को आगे भी जारी रखने की तैयारी

मारवाड़ी महिला समिति की सदस्याओं ने कहा कि अंगदान और नेत्रदान से जुड़े भ्रम दूर करने तथा लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान आगे भी जारी रखा जाएगा. समिति का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग इस मानवीय पहल से जुड़ें.

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आलोक अगस्टीन

लेखक के बारे में

By आलोक अगस्टीन

आलोक अगस्टीन ने वर्ष 2004 से पत्रकारिता में सक्रिय रहने के साथ पत्रकारिता व जनसंचार में माखनलाल से स्नातक तथा स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की हैं. नोएडा के साधना एकेडमी ऑफ मीडिया स्टडीज से फोटो एंड वीडियो जर्नलिज्म में डिप्लोमा के पश्चात 2015 में बेतिया प्रभात खबर से जुड़कर अबतक कार्य कर रहे हैं. इसके पूर्व बेतिया में ही हिन्दुस्तान के साथ साथ पटना के अनेक स्थानीय चैनलों में रिपोर्टर की भूमिका निभाई है.

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