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नरकटियागंज में हजारों एकड़ धान और गन्ने की फसल बर्बाद, किसानों में त्राहिमाम

Updated at : 01 Nov 2025 6:21 PM (IST)
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नरकटियागंज में हजारों एकड़ धान और गन्ने की फसल बर्बाद, किसानों में त्राहिमाम

मोंथा तूफान के असर ने नरकटियागंज प्रखंड के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है.

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नरकटियागंज. मोंथा तूफान के असर ने नरकटियागंज प्रखंड के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है. प्रखंड के सभी 27 पंचायतों में शुक्रवार को हुई तेज बारिश व हवा के कारण हजारों एकड़ खेत में लगी धान और गन्ने की फसल बर्बाद हो गयी है. पकड़ी ढाला, भभटा, सीतापुर, भतौड़ा, जमुनिया, बलुआ, समेत दर्जनों गावों के सैकड़ों किसानों की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी है. किसान चंदन साह, गोवर्धन साह, अनिल यादव, गुडू साह, अरूण भागत, विनोद चौरसिया, अवध किशोर पटेल, घनीलाल साह आदि ने बताया कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गयी है. खेतों में घान की फसल ढह कर पूरी तरह बर्बाद हो गयी है. इस बार चावल खाने को भी नसीब नहीं होगा. प्रमुख प्रतिनिधि चंदन साह ने बताया कि उनके खेतों में धान की कटाई हो चुकी थी, लेकिन सभी धान खेत में ही रह गए. पानी में पूरी तरह डूब गए हैं. वही गन्ने की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है. मिल प्रबंधन की ओर से गन्ने की फसल का आंकड़ा जुटाया जा रहा है. कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि वे बारिश से कितना नुकसान हुआ है. मिल प्रबंधन की ओर से आंकड़ा जुटाया जा रहा है. एक दो दिनों में क्लीयर हो जाएगा. लगातार बारिश से फसलों पर असर, किसानों को जल निकासी और रोग नियंत्रण की सलाह नरकटियागंज. पिछले दो दिनो से जारी बारिश और बदली वाले मौसम का असर खेतों की फसलों पर दिखने लगा है. धान की फसल में इस समय बालियां निकल रही हैं, ऐसे में पीला हरदिया (झूठा कंडुआ) रोग लगने की प्रबल संभावना है. कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम साफ होते ही प्रॉपिकोनाजोल एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. ताकि फसल को रोग से बचाया जा सके. कटाई के बाद खेतों में पड़ी या तेज हवा से गिरी धान की फसल में नुकसान की संभावना अधिक है. खेतों में जलजमाव की स्थिति में किसान जल निकासी का उचित प्रबंध करें. गन्ने की परिपक्व फसल में अधिक पानी भरने से चीनी की मात्रा घट सकती है, इसलिए जल निकासी जरूरी है.रबी मौसम की सब्जियों में अधिक पानी से पौध खराब होने की संभावना रहती है. वहीं, सरसों और अलसी की फसलों के लिए यह हल्की बारिश फायदेमंद है, जबकि चना और मसूर में जड़ सड़न और उकठा रोग की आशंका बढ़ जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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