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ई शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने में 1,982 शिक्षक-शिक्षिकाओं पर गाज

Updated at : 26 Mar 2025 8:42 PM (IST)
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ई शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने में 1,982 शिक्षक-शिक्षिकाओं पर गाज

अब सरकारी स्कूल के शिक्षक -शिक्षिका के लिए अनिवार्य रूप से ई. शिक्षा कोष पोर्टल पर रोज की हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य है.

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बेतिया. अब सरकारी स्कूल के शिक्षक -शिक्षिका के लिए अनिवार्य रूप से ई. शिक्षा कोष पोर्टल पर रोज की हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य है. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने अचूक रूप से इसी आधार पर वेतन का भुगतान का आदेश दिया है. आए दिन इसकी पटना में गठित स्पेशल सेल के अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं. बीते 17 मार्च को हुई जांच में जिला के कुल 461 शिक्षक शिक्षिकाओं की पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाया जाना पकड़ा गया था. उसी दिन संपन्न वीसी बैठक में डॉ. एस सिद्धार्थ ने ऐसे शिक्षक शिक्षिकाओं से जवाब तलब करने के साथ वेतन कटौती जैसी कार्रवाई जारी रखने का आदेश जिला शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह को दिया था. जिसको लेकर कार्रवाई लगातार जारी है.17 मार्च को पकड़े गए जिला के 461 शिक्षक शिक्षिकाओं के शो-कॉज पर विचारण जारी रहने के बीच पुनः विभाग स्तर पर इसको लेकर गठित स्पेशल सेल के द्वारा विगत 19,20 और 21 मार्च को भी ई. शिक्षा कोष पोर्टल की जांच में क्रमशः 259,271 और 991 शिक्षक शिक्षिकाओं को अनुपस्थित पाया गया है.इस प्रकार ई. शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य ऑनलाइन हाजिरी नहीं दर्ज करने में कुल 1982 शिक्षक शिक्षिकाओं से डीईओ ने स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही तथ्यपरक और तर्क संगत जवाब नहीं सौंपने पर उक्त तिथि के वेतन के सुनिश्चित कटौती की चेतावनी दी है. यहां उल्लेखनीय है कि सरकारी विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं की उपस्थित अब ई. शिक्षा कोष एप के माध्यम से दर्ज की जाती है,जिसमें शिक्षकों को सुबह विद्यालय आने का समय और जाने के समय की अपनी अपनी सेल्फी अपलोड कर उपस्थिति दर्ज करनी होती है. अगर कोई शिक्षक अपनी उपस्थित ऑनलाइन दर्ज नहीं करते है तो उन्हें अनुपस्थित माना जाता है. ————– 17 मार्च शुक्रवार होने के बाद भी दर्जनों उर्दू स्कूलों के शिक्षकों से जवाब तलब जिला शिक्षा कार्यालय में अनेक शिक्षक शिक्षिकाओं ने बताया कि ई. शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी की जांच में अनेक तकनीकी खामियां उजागर होने लगी हैं. इसका उदाहरण 17 मार्च को शुक्रवार होने के बावजूद दर्जनों उर्दू स्कूलों के शिक्षक शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा जाना है. इधर डीइओ मनीष कुमार सिंह ने इसके बाबत बताया कि ऐप पर स्कूलों का सामान्य कोड और नाम दर्ज है. कोई वर्गीकरण अपलोड नहीं किया गया है.ऐसे में उर्दू शिक्षक शिक्षिकाओं को निर्देशित किया गया है कि अपने बीईओ से सत्यापन कराने के साथ स्पष्टीकरण सौंपे इस तथ्य को स्वीकार करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई वापस ले ली जाएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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