'ना कहें, भाग जाएं और बात न छिपाएं', छात्राओं को बाल सुरक्षा के अहम टिप्स देकर किया जागरूक

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छात्राओं को गुड और बैड टच की जानकारी देतीं रोटेरियन डॉ अपूर्वा सिन्हा | Prabhat Khabar Network

छात्राओं को गुड और बैड टच की जानकारी देतीं रोटेरियन डॉ अपूर्वा सिन्हा

संत कोलंबस हाई स्कूल, केतिया में छात्राओं के लिए बाल सुरक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई. 'गुड टच' और 'बैड टच' के बीच का अंतर सरल भाषा और ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया गया, साथ ही बच्चों को 'ना कहें, भाग जाएं, बात न छिपाएं' जैसे सुरक्षा के तीन सुनहरे नियम सिखाए गए.

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Child Safety Workshop: बेतिया के संत कोलंबस हाई स्कूल, बेलदारी में छात्राओं को बाल सुरक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गुड टच और बैड टच विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यक्रम का आयोजन रोटरी क्लब सेंट्रल के तत्वावधान में हुआ, जिसमें बच्चों को सरल भाषा और ऑडियो-विजुअल माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी दी गई.

कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों, खासकर छात्राओं को सुरक्षित व्यवहार और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था.

ऑडियो-विजुअल माध्यम से दी गई जानकारी

कार्यक्रम का आयोजन रोटरी क्लब सेंट्रल की प्रेसिडेंट डॉ. शीला रंजन के नेतृत्व में हुआ. विद्यालय की निदेशिका निकहत फातिमा और प्रधानाध्यापिका मीनाक्षी झा के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में क्लब की सेक्रेटरी डॉ. अपूर्वा सिन्हा मुख्य वक्ता रहीं.

उन्होंने पीपीटी और कार्टून चित्रों की मदद से बच्चों को आसान भाषा में गुड टच और बैड टच का अंतर समझाया.

अच्छे और बुरे स्पर्श का समझाया अंतर

डॉ. अपूर्वा सिन्हा ने बताया कि माता-पिता या प्रियजनों का स्नेहपूर्वक गले लगाना और हाथ मिलाना अच्छा स्पर्श (Good Touch) होता है.

वहीं, ऐसा कोई भी स्पर्श जिससे डर, असहजता या गुस्सा महसूस हो, बुरा स्पर्श (Bad Touch) माना जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि कपड़ों से ढके शरीर के हिस्से निजी अंग होते हैं और उन्हें माता-पिता या इलाज के दौरान डॉक्टर एवं नर्स के अलावा किसी अन्य को छूने या देखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

बच्चों को बताए गए सुरक्षा के तीन सुनहरे नियम

कार्यशाला के दौरान बच्चों को अपनी सुरक्षा के लिए तीन महत्वपूर्ण नियम बताए गए—

  • ना कहें.
  • भाग जाएं.
  • बात न छिपाएं.

साथ ही खेल-खेल में की जाने वाली ऐसी गुदगुदी या हरकतों से भी सावधान रहने की सलाह दी गई, जिससे दर्द या असहजता महसूस हो.

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

कार्यक्रम के अंत में निदेशिका निकहत फातिमा और प्रधानाध्यापिका मीनाक्षी झा ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और शारीरिक सीमाओं के प्रति जागरूक करना समय की जरूरत है.

उन्होंने रोटरी क्लब सेंट्रल, प्रेसिडेंट डॉ. शीला रंजन, सेक्रेटरी डॉ. अपूर्वा सिन्हा और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया. कार्यशाला में विद्यालय की शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा सुरक्षा नियमों का पालन करने का संकल्प लिया.


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गणेश वर्मा

लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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