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बीपीएससी से तीन चरणों की आरक्षित कोटि में बहाल जिला के पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की होगी विशेष जांच

Updated at : 16 Dec 2025 6:35 PM (IST)
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बीपीएससी से तीन चरणों की आरक्षित कोटि में बहाल जिला के पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की होगी विशेष जांच

विभिन्न आरक्षित कोटि में बहाल पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच होगी.

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बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले में बीपीएससी टीआरई एक से तीन तक में चयनित कुल 11,248 में से विभिन्न आरक्षित श्रेणी में तब की एस-टेट परीक्षा के आधार पर विभिन्न आरक्षित कोटि में बहाल पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच होगी. निर्धारित आरक्षित श्रेणी के इन पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के निवास,जाति और दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच का आदेश शिक्षा विभाग ने दिया है. अनेक जिलों में फर्जी निवास,जाति और दिव्यांगता प्रमाणपत्र का मामला प्रकाश में आने पर शिक्षा विभाग द्वारा यह कार्रवाई शुरू की गई है.इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा उप निदेशक के द्वारा पश्चिम चंपारण समेत सभी जिलों से इसपर जांच रिपोर्ट मांगी है.डीईओ और डीपीओ को निर्देश दिया गया है कि आरक्षित श्रेणी के इन तीन प्रमाणपत्रों की जांच कर प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया जाए. ऐसा नहीं होने पर उक्त अधिकारी को ही फर्जीवाड़ा का जवाबदेह मानकर कार्रवाई की जाएगी.यहां उल्लेखनीय है कि जिनमें टीआरई एक में सबसे अधिक 4235, दो में 3990 और टीआरई तीन में 3023 अर्थात कुल 11248 शिक्षक शिक्षिकाओं की बहाली जिले में की गई है.इनमें आरक्षण का लाभ लेने वाले पांच हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिका जांच के दायरे में हैं. डेढ़ साल पूर्व ही फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों पर नौकरी का जिले में उजागर हुआ था मामला बीपीएससी से शिक्षक नियुक्ति के अलग-अलग चरणों में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी आवासीय बनाकर आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी करने का मामला पश्चिम चंपारण जिले में करीब डेढ़ साल पहले ही उजागर हुआ था. तब जिला के गंडक पार वाले अंचलों बड़े पैमाने पर सेटिंग गेटिंग में फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी होने की अनेक शिकायत प्राप्त हुई थी. बावजूद इसके तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी रजनीकांत प्रवीण के स्तर तक संबंधित शिक्षक शिक्षिकाओं के पहुंच बना लेने के कारण मामला रफा दफा हो जाने की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जानकार सूत्रों ने दी है.सूत्रों का यह भी कहना है कि सिर्फ यही नहीं, फर्जी दिव्यांगता के आधार पर भी नौकरी लेने का मामला सामने आया था, जिसमें भी कार्रवाई स्पष्टीकरण मांगने से आगे नहीं बढ़ पाई थी.समीपवर्ती उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड और मध्य प्रदेश के सैकड़ों अभ्यर्थियों द्वारा बिहार के अलग-अलग जिलों का फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनवा नौकरी लेने को लेकर स्थानीय छटनी ग्रस्त अभ्यर्थियों ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिक्षा विभाग तक को दिए आवेदन में ऐसे कई मामलों का साक्ष्य भी भेजा था. इसके बाद इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार के संयुक्त सचिव रामा शंकर ने मुख्य निगरानी पदाधिकारी को कार्रवाई करने को लेकर पत्र जारी किया था.बावजूद इसके अब तक इस पर कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई थी.जबकि केवल पश्चिम चंपारण जिले में ही पांच हजार से भी अधिक अभ्यर्थी आरक्षण की अलग अलग कोटि का प्रमाण पत्र लगाकर टीआरई एक, दो और तीन में शिक्षक-शिक्षिका नियुक्त हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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