Bettaih : वर्ष के भीतर चकाचक होंगी शहर की सड़कें, मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था भी होगी दुरुस्त: सांसद

पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ संजय जायसवाल ने मंगलवार को शहर की जमीनी समस्याओं को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया.
– सांसद ने डीएम व मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ की अलग-अलग बैठकें – नगर निगम की कार्यशैली पर उठाए सवाल बेतिया . पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ संजय जायसवाल ने मंगलवार को शहर की जमीनी समस्याओं को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया. उन्होंने जिला पदाधिकारी और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए शहर के विकास से जुड़े निर्देश दिए. सांसद ने बताया कि तीन साल पहले केंद्र सरकार से बेतिया में जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए स्ट्रॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना की स्वीकृति और राशि दिलवाई गई थी, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं की गई. उन्होंने कहा कि शहर की प्रमुख सड़कों के लिए उन्होंने बिहार सरकार से आवश्यक फंड भी उपलब्ध करवाया था, लेकिन नगर निगम किसी भी सड़क परियोजना की शुरुआत नहीं कर सका. उन्होंने विश्वास दिलाया कि अगले एक वर्ष के भीतर बेतिया की सभी प्रमुख सड़कें 2017 से पहले वाली स्थिति में लौट आएंगी जब शहर में कोई सड़क टूटी नहीं रहती थी. मेडिकल कॉलेज प्रबंधक के साथ हुई बैठक के दौरान सांसद ने बेतिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की स्थिति पर भी चिंता जताई. बताया कि लगभग 1100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मेडिकल कॉलेज में फिलहाल 70 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली हैं, जिससे संस्थान अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सका है. सांसद ने वरिष्ठ चिकित्सकों और जिलाधिकारी के साथ बैठक कर इस समस्या के समाधान पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज को बेहतर स्तर पर लाना उनकी प्राथमिकता है. सांसद ने भरोसा दिलाया कि अगले एक साल में बेतिया नगर निगम और बिहार सरकार के सहयोग से सड़क, ड्रेनेज और मेडिकल कॉलेज से जुड़ी सभी प्रमुख समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. ——– बेतिया शहर में भाजपा को कम वोट पर सांसद ने जताई चिंता सांसद डॉ संजय जायसवाल ने बेतिया शहर में भाजपा की पहली हार पर गहरी चिंता व्यक्त की. अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने बताया कि जनसंघ काल से लेकर अब तक बेतिया शहर में भाजपा कभी नहीं हारी थी, लेकिन इस बार 300 वोटों से हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि 1980 में बेतिया में अल्पसंख्यक समाज की जनसंख्या 18 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 34 प्रतिशत तक पहुंच गई है. सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं का असर अल्पसंख्यक वोटों पर दिखाई नहीं देता है.
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