बेतिया. पोक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले में भी गिरफ्तारी एवं रिमांड कानून की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना शिकारपुर पुलिस को भारी पड़ गया. शिकारपुर थाना कांड संख्या 49/2026 में गिरफ्तार चार अभियुक्तों को अदालत ने जेल भेजने से साफ इनकार कर दिया. वजह बताया गया कि गिरफ्तारी का ठोस, विशिष्ट और विधिसंगत कारण न्यायालय के समक्ष पेश ही नहीं किया गया. पोक्सो अधिनियम के विशेष न्यायाधीश जावेद आलम ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए कोई वैधानिक आधार नहीं बताया गया है. इसे माननीय सुप्रीम कोर्ट की गिरफ्तारी व रिमांड से जुड़ी गाइडलाइन का उल्लंघन मानते हुए न्यायालय ने रिमांड से इनकार कर दिया. हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्तों को सख्त शर्तों के साथ पर्सनल बांड पर रिहा किया. शर्त यह रखी गई कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे. इतना ही नहीं, न्यायाधीश ने अनुसंधानकर्ता को स्पष्ट निर्देश दिया कि आगे यदि अभियुक्तों के विरुद्ध इस मामले में पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं, तो न्यायालय की अनुमति के बाद ही गिरफ्तारी की जाए. मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने अनुसंधानकर्ता और शिकारपुर थानाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. नोटिस में पूछा गया है कि जब कांड दैनिकी में कोई ठोस और विधिसंगत आधार दर्ज नहीं था, तब अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए अदालत में क्यों प्रस्तुत किया गया. न्यायाधीश ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी एवं रिमांड के संबंध में दिए गए प्रावधानों का उल्लंघन माना है.
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