स्वप्निल छायावाद से उबार कर हिंदी को लोक चेतना, चिंतन और वेदना जोड़ती है कविवर नेपाली की कविता : प्रो.सतीश

Published by :SATISH KUMAR
Published at :18 Apr 2025 9:24 PM (IST)
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स्वप्निल छायावाद से उबार कर हिंदी को लोक चेतना, चिंतन और वेदना जोड़ती है कविवर नेपाली की कविता : प्रो.सतीश

शुक्रवार को ''वर्तमान राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में गोपाल सिंह नेपाली के काव्य की प्रासंगिकता'' विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई.

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बेतिया. ईश्वर शांति महाविद्यालय झखरा नौतन के परिसर में कविवर गोपाल सिंह नेपाली की पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में शुक्रवार को ””वर्तमान राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में गोपाल सिंह नेपाली के काव्य की प्रासंगिकता”” विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई.समारोह को बतौर मुख्य अतिथि व वक्ता के रूप में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में कला संकाय के अध्यक्ष और हिंदी के लब्ध प्रतिष्ठित विद्वान प्रो.(डॉ) सतीश कुमार राय ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि कविवर गोपाल सिंह नेपाली की कविताओं में कुंठा नहीं प्रेम की उन्मुक्तता है.उनके प्रेम सामान्य नहीं,उसमें प्रकृति है,राष्ट्रीयता है, मानवीयता और दाम्पत्य रोमांच का भी अद्भुद लालित्य है. विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.राय ने बताया कि स्वप्निल छायावाद से उबर कर नेपाली जी की कविताएं जीवन के यथार्थ से जुड़ गईं हैं. उन्होंने कहा कि कविवर नेपाली ने हिंदी कविता को लोक चेतना, चिंतन और वेदना जोड़ने का कार्य किया है.संगोष्ठी में विषयगत विवेचन में प्रो.सतीश ने कहा कि राष्ट्रीय पटल पर आज के भाषा विवाद वाले दौर में कविवर नेपाली की कविताएं संवाद और समाधान पैरोकारी करतीं हैं. इससे पूर्व विशिष्ट वक्ता और एमजेके कॉलेज में हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ) परमेश्वर भक्त ने कहा कि हिंदी कविता को छाया वाद के स्वप्निल लोक से समकालीन लोक जीवन को दायित्वबोध के धरातल पर पहुंचाने वाले कविवर नेपाली के हम सदा ऋणी रहेंगे.डॉ.दिवाकर राय ने कहा कि नेपाली के शिव भक्ति गीत को सूरदास की रचना बताने वाले फिल्मकार को कोर्ट में माफीनामा दाखिल करने के लिए विवश होने की चर्चित घटना नेपाली जी काव्य सौष्ठव की महत्ता का एक उत्तम उदाहरण है. संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे अम्मा ट्रस्ट के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र शरण ने कहा कि आज हमारा महाविद्यालय परिवार गौरवान्वित है कि कविवर गोपाल सिंह नेपाली की कविताओं का वर्तमान परिपेक्ष में मूल्यांकन मंच हमारे संस्थान में सजा है. संगोष्ठी के प्रो.राजीव कुमार, डॉ. कुमारी अन्नू डॉ.राजेश कुमार चंदेल, डॉ. जगमोहन ने भी संबोधित और राहुल चतुर्वेदी ने संचालन किया.

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