भाई के लिए बहनों के प्यार का त्योहार पीड़िया व्रत हर्षोल्लास के साथ संपन्न

Published by : SATISH KUMAR Updated At : 22 Nov 2025 6:20 PM

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भाई की लंबी आयु के लिए पीड़िया व्रत रखी बहनों ने शनिवार को मंगल गीतों के साथ अहले सुबह तालाबों और नदी-घाटों पर पानी में विसर्जित किया.

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हरनाटांड़ . भाई की लंबी आयु के लिए पीड़िया व्रत रखी बहनों ने शनिवार को मंगल गीतों के साथ अहले सुबह तालाबों और नदी-घाटों पर पानी में विसर्जित किया. हालांकि इस दौरान कई जगहों पर मेला जैसा नजारा देखने को मिला. विभिन्न गांव से सैकड़ों कन्या और महिलाओं ने शुक्रवार को भाई की सुख-समृद्धि के लिए पीड़िया व्रत रखा उसके बाद शनिवार की सुबह लाउडस्पीकर व डीजे के मधुर स्वर वातावरण में मन-मगन कर दिया. महिलाएं गीत गाती हुई माथे पर गुब्बारे, फूल, मोमबत्ती, अगरबत्ती से सजी बांस की टोकरी में पीड़िया को लेकर सुबह करीब 5 बजे नदी, तालाबों और जलाशयों के किनारे पहुंची. जहां दीपक जलाकर महिलाओं और कन्याओं ने भाई की लंबी उम्र के लिए पूजा अर्चना किया और नदी तालाबों में पीड़िया विसर्जित किया, यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे तक जारी रहा. गोवर्धन पूजा से होती है पीड़िया की शुरुआत बता दें कि कन्याओं ने भाई की लंबी उम्र के लिए पिछले एक माह से पीड़िया लगा रखा था. जिसके बाद शुक्रवार की सुबह दीवार से पीड़िया छुड़ाने के बाद बहनों ने निर्जला व्रत रखा. वही शाम को मीठे रसियाव के साथ सोरहिया ग्रहण किया. जबकि शनिवार को नारायणी गंडक नदी, भपसा, रोहुआ नदी तथा तालाबों में पीड़िया विसर्जित करने के बाद व्रत समाप्त हो गया. इसके बाद साथ लाए भुजा, चुड़ा, बतासा, खाजा, लड्डू, गट्टा, लकठा मिठाई व फल आपस में बांटकर प्रसाद रूप में ग्रहण कर व्रत तोड़ा. बताते चले कि पीड़िया व्रत की शुरुआत गोवर्धन पूजा के दिन से ही हो जाती है. गोवर्धन पूजा के गोबर से ही घर के दीवारों पर छोटे-छोटे पिंड के आकार में लोक गीतों के माध्यम से पीड़िया लगाई जाती है. जितने भाई उतना धान रिंकी, सोनाली, काजल, अंजलि, जिया, रागनी, पूजा, अर्चना, साक्षी आदि ने बताया कि व्रत का खास बात यह है कि धान की संख्या भाइयों की संख्या के अनुसार होती है. यानि व्रत रखने वाली लड़की के जितने भाई होते हैं उसी संख्या के हिसाब से प्रति भाई 16 धान से चावल निकालकर वह सोरहिया निगलती है. व्रत के बाद सुबह में तालाब या नदी, पोखरों में पीड़िया के पारंपरिक गीतों के साथ बड़े ही उत्साह से इस पीड़िया को विसर्जित की जाती हैं.

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