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Bettiah: जश्न व विजय की प्रतीक होती है खजूर की डालियां : विजी

Updated at : 13 Apr 2025 9:08 PM (IST)
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Bettiah: जश्न व विजय की प्रतीक होती है खजूर की डालियां : विजी

खजूर की डालियां जश्न व विजय का प्रतीक है. इस रविवार विश्व का कोना कोना खजूर रविवार अर्थात दुखभोग का रविवार मना रहा है.

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बेतिया. खजूर की डालियां जश्न व विजय का प्रतीक है. इस रविवार विश्व का कोना कोना खजूर रविवार अर्थात दुखभोग का रविवार मना रहा है. येरूशलम में ऐसी मान्यता थी कि जब कोई राजा युद्ध के बाद विजयी होकर वापस लौटता था, तो लोग उसके स्वागत में खजूर की डालियां लहराते थे. इस रविवार को पैसन संडे या दुखभोग का रविवार इसलिए भी कहते है कि इसके बाद येसु का मरण संकट, दोषारोपण, मृत्यु और पुनरूत्थान आता है.

रविवार को पाम संडे अर्थात खजूर इतवार के मौके पर नगर के महागिरजाघर नेटिविटी ऑफ द ब्लेस्ड वर्जिन मेरी में आयोजित विशेष प्रार्थना को संबोधित करते हुए बेतिया धर्मप्रांत के विकर जेनरल (विजी) फादर फिंटन साह ने उक्त बातें कहीं. विजी ने कहा कि पाम संडे के साथ ही पुण्य सप्ताह का की शुरुआत होती है. यह सप्ताह बहुत विशेष है. इस सप्ताह गद्दारी से गिरफ्तारी, क्रूस आरोपन, मृत्यु और पुनरूत्थान अर्थात मृत्यु पर विजय भी होती है. उन्होंने कहा कि हम सब हाथों में खजूर की डालियां लेकर होसान्ना के नारे लगाते हुए संत तेरेसा स्कूल से गिरजाघर में प्रवेश किये है. होसान्ना एक इब्रानी शब्द है. जो यशा अर्थात बचाने वाला तथा अन्ना अर्थात हम विनती करते है, के मेल से बना है. जिसका अर्थ होता है. हम विनती करते हैं, हमारा उद्धार कर, हमें बचा.

गिरजाघर में विशेष प्रार्थना के पूर्व अहले सुबह संत तेरेसा विद्यालय परिसर में खजूर की डालियों पर आशीष दी गई. इसके पश्चात यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु हाथों में खजूर की डालियां लेकर भजन गाते हुए गिरजाघर परिसर में प्रवेश किये. मौके पर गिरजाघर के मुख्य पुरोहित फादर हेनरी फर्नांडो, फादर राबर्ट तिग्गा, फादर विपिन किस्पोट्टा के साथ तमाम ईसाई धर्मावलंबी उपस्थित रहें.

शुरू हुआ पुण्य सप्ताह, होगी प्रार्थनाएं

पाम संडे के साथ ही पुण्य सप्ताह शुरू हो गया है. पूरे एक सप्ताह तक गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाओं का दौर चलेगा. इस क्रम में आने वाले गुरुवार को पुण्य बृहस्पतिवार के मौके पर प्रभु यीशु द्वारा अपने शिष्यों के साथ बिताये गये अंतिम समय की याद में प्रार्थना होगी. जिसमें पुरोहितों द्वारा बारह लोगों के पांव धोये जायेंगे. इसके बाद से रात बारह बजे तक गिरजाघरों में आराधना होगी. वहीं शुक्रवार को विश्व स्तर पर मनाये जाने वाले गुड फ्राइडे के दिन सुबह में क्रूस यात्रा का आयोजन होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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