Human Trafficking Case: 3 मासूमों की तस्करी नाकाम, अब मां-बेटे को मिली उम्रकैद की सजा

Human Trafficking Case: 3 मासूमों की तस्करी नाकाम, अब मां-बेटे को मिली उम्रकैद की सजा
बगहा व्यवहार न्यायालय ने मानव तस्करी के गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. पश्चिम बंगाल के मां-बेटे को तीन नाबालिग बच्चियों को तस्करी कर ले जाने के आरोप में सश्रम आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है.
Human Trafficking Case: बिहार से तीन नाबालिग बच्चियों को पश्चिम बंगाल ले जाकर मानव तस्करी करने के प्रयास के मामले में बगहा व्यवहार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने पश्चिम बंगाल के रहने वाले मां-बेटे को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने पर तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
22 जनवरी 2026 को हुई थी गिरफ्तारी
यह मामला नौरंगिया थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है. अदालत के आदेश के अनुसार 22 जनवरी 2026 को सूचना मिली थी कि एक महिला और एक युवक तीन नाबालिग बच्चियों को मानव तस्करी के उद्देश्य से बिहार से पश्चिम बंगाल ले जा रहे हैं. सूचना मिलने पर नौरंगिया थाना पुलिस और मानव व्यापार निरोधक इकाई ने संयुक्त कार्रवाई की.
हरदिया चांटी के पास पुलिस ने तीनों बच्चियों के साथ नियोती देवी (43) और उसके पुत्र नागेश भुइयां (19) को पकड़ लिया. दोनों पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के रहने वाले हैं.
आसनसोल ले जाने की थी तैयारी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित बच्चियों को बहला-फुसलाकर पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे और वहां उन्हें बेचने की तैयारी थी. तलाशी के दौरान आरोपितों के पास से बगहा से आसनसोल तक के रेलवे टिकट और मोबाइल फोन बरामद किए गए. इसके बाद दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
पांच गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर हुई सजा
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए. इनमें मानव व्यापार निरोधक इकाई और नौरंगिया थाना के पुलिस अधिकारी, सूचक और अनुसंधानकर्ता शामिल थे. इसके अलावा जब्ती सूची, गिरफ्तारी ज्ञापन, प्राथमिकी और आरोप पत्र समेत अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए गए. इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी माना.
मानव तस्करी पर अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि मानव तस्करी केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर गंभीर हमला है. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 23 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि मानव तस्करी पर स्पष्ट प्रतिबंध है.
हर साल बड़ी संख्या में लापता होते हैं बच्चे
अदालत ने अपने आदेश में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बच्चे लापता होते हैं, जिनमें अधिकांश लड़कियां होती हैं. अदालत ने यह भी कहा कि मानव तस्करी के पीछे संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय हैं, जो गरीब और कमजोर परिवारों का शोषण करते हैं.
साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध
अदालत ने माना कि आरोपितों के पास से पश्चिम बंगाल जाने का टिकट मिलना, तीन नाबालिग बच्चियों के साथ पकड़ा जाना और बच्चियों को साथ ले जाने का कोई संतोषजनक कारण नहीं बता पाना, मानव तस्करी की मंशा को स्पष्ट करता है. इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
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लेखक के बारे में
By गणेश वर्मा
गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।
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